आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जितनी तेजी से कारोबार और तकनीक को बदल रहा है, उतनी ही तेजी से साइबर अपराधी भी इसका फायदा उठा रहे हैं।IBM की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि अब हर चार में से एक दुर्भावनापूर्ण डेटा ब्रीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अंजाम दिया जा रहा है।इन हमलों में डीपफेक, AI आधारित मैलवेयर और ऑटोमेटेड अटैक जैसे तरीके शामिल हैं।रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे हमले न केवल तेजी से बढ़ रहे हैं, बल्कि कंपनियों को आर्थिक रूप से भी पहले से ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
IBM की 2026 Cost of a Data Breach Report के अनुसार AI सक्षम साइबर हमलों की संख्या पिछले साल की तुलना में 56 प्रतिशत बढ़ गई है।रिपोर्ट में बताया गया है कि AI आधारित डेटा ब्रीच से प्रभावित कंपनियों को औसतन 6 मिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। यह वैश्विक औसत डेटा ब्रीच लागत 4.99 मिलियन डॉलर से करीब 1 मिलियन डॉलर अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक AI की मदद से साइबर अपराधी कम लागत में तेजी से हमले कर पा रहे हैं, जबकि कंपनियों को इन हमलों का पता लगाने और उन्हें रोकने में काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि AI आधारित हमलों में डीपफेक पहचान की नकल और AI सक्षम मैलवेयर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से साइबर अपराधी लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर सकते हैं और सिक्योरिटी सिस्टम्स को चकमा देने की कोशिश करते हैं।
इसके अलावा कई मामलों में AI मॉडल या AI एप्लिकेशन सीधे निशाना नहीं बने, बल्कि उनसे जुड़े API, प्लग-इन और क्लाउड कॉन्फिगरेशन की कमजोरियों का फायदा उठाकर हमले किए गए।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन कंपनियों ने अपने साइबर सुरक्षा सिस्टम में AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल किया, उनके डेटा ब्रीच की औसत लागत करीब 2 मिलियन डॉलर तक कम रही।
इसके बावजूद हर चार में से एक संगठन अब भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था में AI आधारित टूल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साइबर अपराधियों और कंपनियों के बीच सुरक्षा का अंतर और बढ़ सकता है।
AI आधारित हमलों का सबसे ज्यादा असर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों पर देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे 62 प्रतिशत हमले क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर हुए।
वित्तीय संस्थानों को औसतन 6.3 मिलियन डॉलर और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को लगभग 5.2 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।ऐसे हमले केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सप्लाई चेन, अर्थव्यवस्था और जरूरी सेवाओं पर भी असर डाल सकते हैं।
रिपोर्ट में शामिल एक अलग सर्वे के अनुसार 85 प्रतिशत संगठनों ने कहा कि वे एडवांस AI आधारित साइबर खतरों को देखते हुए अपने साइबर सुरक्षा बजट में बढ़ोतरी करने की योजना बना रहे हैं।यह संख्या उन संगठनों से भी ज्यादा है जो किसी डेटा ब्रीच का सामना करने के बाद सुरक्षा खर्च बढ़ाने की बात करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियों को केवल हमले के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से मजबूत सुरक्षा रणनीति तैयार करनी होगी।AI के दौर में साइबर सुरक्षा का मतलब सिर्फ डेटा बचाना नहीं, बल्कि लगातार बदलते खतरों के साथ तेज गति से खुद को अपडेट रखना भी है।

