1 अगस्त से आ रहा CKYC 2.0, बार-बार KYC के झंझट से मिलेगी मुक्ति

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Single KYC भारत बहुत जल्द ही CKYC 2.0 यानी कि सेंट्रल नो योर कस्टमर प्रोजेक्ट लॉन्च करने की तैयारी में है। यह नया सिस्टम लोगों की पहचान करने के प्रोसेस को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI, SEBI और IRDAI मिलकर इसे अगस्त 2026 में शुरू कर सकते हैं। इस नए सिस्टम की वजह से बैंक खाता खोलने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने या बीमा खरीदने के लिए अलग-अलग KYC नहीं करानी पड़ेगी।CKYC 2.0 आने के बाद बार-बार KYC कराने के झंझट और कागजात जमा कराने से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

यह भारत के मौजूदा सेंट्रल केवाईसी रजिस्ट्री का एक अपग्रेडेड और हाई-टेक वर्जन है। इसकी मदद से एक सुरक्षित सेंट्रल डेटाबेस से ग्राहकों की वेरिफाइड पहचान सीधे प्राप्त की जा सकेगी।
इसके बाद आपको बार-बार डॉक्यूमेंट्स जमा कराने की जरूरत नहीं रहेगी। इस प्रोसेस में यूजर की सहमति की खासा भूमिका होगी और डेटा को एक्सेस करने से पहले यूजर के पास OTP आएगा।

पुराने CKYC सिस्टम में डुप्लीकेट एंट्री और पुरानी जानकारी अपडेट ना होने जैसी कुछ खामियां थीं,जिसकी वजह से बैंक या बीमा कंपनियां लोगों से बार-बार डॉक्यूमेंट्स मांगते थे।
CKYC 2.0 के साथ ये समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। नया सिस्टम डेटा की सटीकता और अपडेटेड रिकॉर्ड्स को सुनिश्चित करेगा। इससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय और मेहनत दोनों बचेंगे।

नए CKYC 2.0 का मकसद बैंकिंग के साथ-साथ म्यूचुअल फंड और बीमा के क्षेत्र में लोगों की भागीदारी को बढ़ाना है।
इन क्षेत्रों में अक्सर लोग मुश्किल KYC प्रोसेस की वजह से ज्यादा रुचि नहीं दिखाते।
इसके अलावा, CKYC 2.0 वित्तीय धोखाधड़ी रोकने में बेहद मददगार साबित होगा। दरअसल एक सेंट्रल डिजिटल पहचान प्रणाली होने से रेगुलेटर्स और एजेंसियां संदिग्ध लेन-देन पर आसानी से नजर रख सकेंगी।
इस सिस्टम में आपका एक बार सेंट्रल डेटाबेस में रजिस्ट्रेशन होगा और आपको 14 अंकों का CKYC नंबर मिल जाएगा।
इसके बाद आपको किसी भी बैंक, Mutual Fund या बीमा कंपनी में बार-बार डॉक्यूमेंट्स नहीं जमा करने पड़ेंगे।
आपके डेटा को कोई भी आपकी अनुमति के बिना एक्सेस नहीं कर पाएगा। किसी को भी इसे एक्सेस करने के लिए आपके नंबर पर आने वाले OTP की जरूरत पड़ेगी।

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