शिंदे की राह पर चल चुके हैं जदयू के उपेंद्र कुशवाहा!

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न्यूज़ डेस्क
कब कौन पलटी मारे यह कौन जानता है! राजनीति जब लाभ-हानि पर टिकी हो तब किसी भी नेता के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। कई बार नीतीश कुमार भी जब पलटी मार चुके हैं तो कुशवाहा अगर कुछ वैसा ही करने को तैयार हैं तो इसमें नयी बात तो कुछ भी नहीं। भारतीय राजनीति में पलटीमार नेताओं की लम्बी सूची दर्ज है। लेकिन एक बात यह साफ़ है कि जदयू नेता कुशवाहा आज जो भी करने जा रहे हैं उसमे बीजेपी की भूमिका भी कमतर नहीं है। कह सकते हैं कि जो खेल महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ हुआ, वही खेल बिहार में होने जा रहा है। मकसद केवल एक ही है कि जो बीजेपी को चुनौती देगा उसकी हालत ऐसी ही होगी। महाराष्ट्र में उद्धव ने बीजेपी का साथ छोड़ा था ,पार्टी टूट गई ,पार्टी की उद्धव के हाथ से निकल गई और चुनाव चिन्ह भी।

कुशवाहा भी उसी राह पर है। बिहार के शिंदे बनते दिख रहे हैं कुशवाहा। अंजाम क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन इसका कुछ असर तो आगामी चुनाव पर पड़ेंगे। कुशवाहा अगर अलग होकर चुनाव लड़ते हैं तो कुछ सीटों पर वे असर दाल सकते हैं। भले ही उनके कोई भी उम्मीदवार खड़े जीत नहीं पाए लेकिन सामने वाले को हरा तो सकते हैं। बीजेपी की यही रणनीति है।

तो खबर तो यही है कि उपेंद्र कुशवाहा फिर से जदयू छोड़ने जा रहे हैं। आज संभवतः कोई बड़ा फैसला वे कर भी ले। संभव है कि वे अपनी पुरानी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी यानी रालोसपा को ज़िंदा कर ले। या कोई और नाम से पार्टी मैदान में खड़ा कर ले। लेकिन भले ही कुशवाहा समाजवादी राजनीति करने की बात कर रहे हो अंत तो यही होगा कि वे बीजेपी के लिए काम करेंगे।

सबसे बड़ी बात तो यही है कि पार्टी चलाने के लिए कुशवाहा पैसा कहाँ से लाएंगे। पिछली बार भी जब वे जदयू के साथ जुड़े थे तो धन के अभाव में पार्टी न चला पाने की बात सामने आयी थी। तो क्या अब कुशवाहा के पास धन का जुगाड़ हो गया है कि बिहार जैसे राज्य में कोई पार्टी वे संचालित कर लेंगे। हो सकता है कि ऐसा कर भी ले लेकिन उसकी परिणीति क्या होगी ?

आज पटना के मौर्या होटल में कुशवाहा का प्रेस कॉन्फ्रेंस होना है। बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी जुटेंगे। कहा जा रहा है कि वे कोई बड़ा ऐलान भी करेंगे। कैसा ऐलान ? वही पार्टी छोड़ने और पार्टी बनाने का ऐलान ही तो। लेकिन इस खेल पर जदयू की भी नजर है और कई और दलों की भी। अगर आज कोई नया नया ऐलान कुशवाहा करते हैं तो बिहार की जातीय राजनीति में एक और खेल होगा। नीतीश कुमार का क्या होगा यह तो बाद की बात होगी बीजेपी को इससे क्या लाभ होगा इसकी चर्चा ज्यादा ही होगी।

विचित्र खेल चल रहा है। दो दिन पहले माले की बैठक हुई जिसमे महागठबंधन के कई नेता शामिल हुए। खुद सीएम नीतीश कुमार भी पहुंचे। तेजस्वी यादव भी पहुंचे और कांग्रेस के सलमान खुर्शीद भी पहुंचे। सबने अपने अपने अंदाज में बहुत कुछ बोले। नीतीश कुमार ने विपक्ष को एकजुट होने और कहा कि कांग्रेस आगे आती है तो बीजेपी को 100 सीटों पर समेटा जा सकता है। लेकिन कांग्रेस अभी इस पर मौन है। रायपुर में कांग्रेस का मंथन होना है जिसमे इन सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। लेकिन उधर आज ही पटना में जदयू के भविष्य को लेकर कुशवाहा ने पार्टी नेताओं की दो दिवसीय बैठक भी बुलाई है। इसमें राज्य भर के जदयू नेताओं को बुलाया गया है। कुशवाहा कह रहे हैं कि जदयू को बचाने और उसकी मजबूती के लिए यह सब किया जा रहा है। लेकिन सवाल है कि जब जदयू के बड़े नेताओं को ही इस बैठक की जानकारी नहीं है तो इस बैठक के जरिये कुशवाहा साफ़ कर चुके है कि उनकी इस बैठक में जो लोग आएंगे वे उनके समर्थक होंगे। साफ़ है कि जदयू में टूट की संभावना बढ़ गई है और कुशवाहा शिंदे की तरह ही बीजेपी के लिए राजनीति करते दिख रहे हैं।

गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा जदयू में अपनी हिस्सेदारी मांग रहे हैं। उन्होंने जदयू और राजद के बीच हुई डील को लेकर भी नाराजगी जताई थी। हालांकि, पटना में रविवार को जदयू नेताओं के साथ चितंन शिविर में लगाए पोस्टर में उपेंद्र कुशवाहा के अलावा नीतीश कुमार, जॉर्ज फर्नांडीज और शरद यादव की तस्वीर भी लगी है। लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा पोस्टर से नदारद हैं। उपेंद्र कुशवाहा की ओर से आयोजित जदूय कार्यकर्ताओं के खुले अधिवेशन में दो हजार कार्यकर्ता शामिल हुए हैं।

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