कॉकरोच को लेकर पीएम मोदी का स्वच्छता अभियान, सोनम वांगचुक से वार्ता शुरू

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कॉकरोच वैसे तो बड़ा पुराना शब्द है जिसका शाब्दिक अभिप्राय गंदगी और रोग फैलाने वाले एक छोटे से प्राणी से, लेकिन भारतीय राजनीति में यह शब्द इस समय सबसे ज्यादा ऊर्जावान हो गया है खासकर अपने डिजिटल स्वरूप में। वर्तमान संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने किया जबकि उन्होंने कुछ लिखा विशेष संदर्भ मैं युवाओं की एक समूह को कॉकरोच का दिया। फिर क्या था देश की कुछ राजनीतिक दल के नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कही उसे बात को लपक लिया और खुद को पर्दा के पीछे रखते हुए अभिजीत दीपके के द्वारा डिजिटल फॉर्मेट में कॉकरोच जनता पार्टी का गठन करवा दिया और अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में लग गए।

इस समय नीट यूजी की परीक्षा में पेपर लीक का एक बड़ा मामला हो गया और इन राजनीतिक दल के नेताओं को एक बड़ा मौका हाथ लग गया। नीत यूजी परीक्षा के पेपर लीक मामले को आधार बनाकर नरेंद्र मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने सोनम वांगचुक के साथ मिलकर जंतर मंतर से अपना आंदोलन प्रारंभ कर दिया।

जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में सोनम वांगचूक आमरणअनशन पर बैठ गए और पर्दे के पीछे रहकर कॉकरोच जनता पार्टी बनवाने वाले नेता सामने आकर मंच संभालने लगे। मंच संभालने वाले नेताओं में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल प्रमुखता से हिस्सा लेते रहे जबकि कांग्रेस पार्टी समाजवादी पार्टी ने अपने कुछ नेताओं को जंतर मंतर पर भेज कर इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। अन्ना आंदोलन की तरह एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल बड़ा राजनीतिक फायदा ना उठा ले इस दृष्टिकोण से ना तो कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने कभी जंतर मंतर पर आकर मंच साझा किया और ना ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने। इसके अलावा जेएनयू के कुछ छात्रों और सिने जगत की कुछ हस्तियों ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया। प्रकट रूप में कॉकरोच जनता पार्टी जैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म का गठन करने वाला अभिजीत दीपके भी इस मंच को साझा कर रहे थे।

अपने बाह्य स्वरूप में तो यह आंदोलन छात्रों और युवाओं के हित के लिए चलाया जा रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर यहां किस प्रकार से पीएम मोदी की सरकार की कुल दिला दी जाए इसकी रणनीति तैयार हो रही थी। बांग्लादेश और नेपाल में जैन जी के द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने जैसी योजनाएं भी यहां बनाई जा रही थी। छात्रों और युवाओं के हित से जुड़े हुए मुद्दे यहां पूरी तरह से खत्म हो गए थे। सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की भी चिंता किसी को नहीं थी, बल्कि सरकार को मिल रही कई खुफिया सूचनाओं में यह बात भी सामने आ रही थी की सोनम वांगचुक के जान के शर्त पर भी पीएम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकने वाला आंदोलन तैयार करने की कोशिश की जा रही । मोदी विरोधी लोभी की तरफ से इन लोगों के खर्चे चलाए जा रहे थे। सोनम वांग चक उपवास पर रहते थे लेकिन बाकी नेताओं का दिनभर खाना पीना चलते रहता था और ऊपर से नाच गाना और मौज मस्ती अलग। शायद नहीं लग रहा होगा की नरेंद्र जी सरकार तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पर तैयार होगी नहीं, ऐसे में अगर भूख हड़ताल से सोनम वांगचुक की जान चली जाती है तो फिर उनके नाम पर देशव्यापी आंदोलन चलाकर यह पीएम मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकने में कामयाब हो जाएंगे।

इधर पीएम मोदी भी सोनम वांगचूक के जान की कीमत पर भी उनकी सरकार को बुखार फेंकने की तैयारी कर रहे इन कॉकरोचों पर थी। ऐसे में नरेंद्र मोदी के रणनीतिकारों ने किसी से भूख हड़ताल की वजह से सोनम वांगचुक की जान जाने की संभावना से संबंधित एक पीआईएल दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल करवा दिया। इसके बाद दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को उच्च न्यायालय के तरफ से सोनम वांगचुक के जीवन को बचाने का निर्देश आया और नरेंद्र मोदी सरकार ने तत्काल इस पर अमल करते हुए दिल्ली पुलिस और खूब पैरा मिलिट्री फोर्स की मदद से सोनम वांगचुक को जंतर मंतर स्थित धरना स्थल से उठाकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए भर्ती करवा दिया।

सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करने के बावजूद कॉकरोच ने गंदगी फैलानी जारी रखी अरविंद केजरीवाल और कई प्रमुख राजनीतिक दल के नेताओं ने सोनम वांगचुक को जबरन धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए नरेंद्र मोदी की सरकार को तानाशाह और तुनुक मिजाजी बता कर अपना आंदोलन जारी रखना चाहा, लेकिन पीएम मोदी के रणनीतिकारों ने मानसून सत्र के नाम पर इन सारे जगह पर धारा 144 लागू करवा कर यहां से सारे आंदोलनकारियों को हटने के लिए मजबूर कर इनके सारे प्रयासों पर पानी फेर दिया।
परिस्थितियों अब पूरी तरह से बदल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पक्ष में आ गई। क्यों कहीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रणनीति से इन कॉकरोच को अपने बिल में घुसने के लिए बाध्य कर दिया। एक तो नरेंद्र मोदी की सरकार ने जल्दी ही नीति ग की द्वारा परीक्षा करवा कर उसके परिणाम घोषित करवा दिए और दूसरा की सोनम वांगचुक के द्वारा अनशन तोड़ने के लिए सरकार के पास जो तीन शर्ते भेजी थी उन सभी शर्तों को मान लिया।

सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के समक्ष निम्नलिखित तीन प्रमुख शर्तें और मांगें रखीं:

शिक्षा प्रणाली की विफलता पर जवाबदेही: केंद्र सरकार हाल ही में हुई परीक्षाओं (विशेषकर NEET पेपर लीक और अनियमितताओं) में सिस्टम की खामियों और विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
संसद में मुद्दा उठाना: राजनीतिक नेता और सांसद यह आश्वासन दें कि इस शिक्षा और पेपर लीक के मुद्दे को संसद के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।

नेताओं द्वारा व्यक्तिगत आश्वासन: यदि स्वास्थ्य कारणों से वह संसद मार्च में शामिल होने में असमर्थ रहे, तो शीर्ष राजनीतिक नेता अस्पताल आकर उनसे मिलें और इन मांगों के समाधान का व्यक्तिगत आश्वासन दें।

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