Prostate Cancer Awareness: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है, जब यह काफी आगे बढ़ चुकी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पेशाब से जुड़ी लगातार रहने वाली समस्याओं या शरीर में असामान्य बदलावों को केवल बढ़ती उम्र का असर मानकर टालना सही नहीं है। समय पर जांच और सही उपचार से इस बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज संभव हो सकता है।
शुरुआती चरण में नहीं दिखते स्पष्ट लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह धारणा सही नहीं है कि प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ होती है। कई मरीज शुरुआती अवस्था में पूरी तरह सामान्य महसूस करते हैं। इसलिए, विशेषकर 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों को नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रोस्टेट स्क्रीनिंग करानी चाहिए, भले ही उन्हें कोई परेशानी महसूस न हो।प्रोस्टेट कैंसर के 5 संकेत, जिन्हें गंभीरता से लें
1. रात में बार-बार पेशाब आना
अगर रात के समय कई बार उठकर पेशाब जाना पड़ रहा है या अचानक पेशाब की आवृत्ति बढ़ गई है, तो यह प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
2. पेशाब करने में कठिनाई
यदि पेशाब शुरू करने में दिक्कत हो, मूत्र की धार कमजोर हो, अधिक जोर लगाना पड़े या ऐसा महसूस हो कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
3. पेशाब या वीर्य में खून आना
पेशाब या वीर्य में खून दिखाई देना सामान्य नहीं माना जाता। ऐसा होने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए, क्योंकि इसके पीछे कई गंभीर कारण हो सकते हैं।
4. कमर, कूल्हों या पेल्विस में लगातार दर्द
यदि कमर, कूल्हों या श्रोणि (पेल्विस) के आसपास लगातार दर्द बना रहता है और इसके साथ पेशाब संबंधी समस्याएं भी हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
5. बिना कारण वजन घटना और लगातार थकान
बिना किसी विशेष वजह के तेजी से वजन कम होना या लंबे समय तक थकान महसूस होना भी शरीर का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है, जिसकी चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।
किन पुरुषों में ज्यादा रहता है जोखिम?
विशेषज्ञों के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यदि परिवार में पिता, भाई या अन्य करीबी रिश्तेदार को पहले प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, तो जोखिम और अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
हर लक्षण का मतलब कैंसर नहीं होता
डॉक्टरों का कहना है कि ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से प्रोस्टेट कैंसर है। कई बार इनकी वजह सामान्य प्रोस्टेट संबंधी या मूत्र मार्ग की अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। लेकिन बिना जांच के वास्तविक कारण का पता नहीं लगाया जा सकता। यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों की सलाह है कि शरीर में लगातार होने वाले बदलावों को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज न करें। किसी भी असामान्य लक्षण के बने रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

