पीएम मोदी का नागरिकों से सोना नहीं खरीदने की अपील के प्रत्यक्ष- परोक्ष कारण

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को तेलंगाना के सिकंदराबाद (हैदराबाद) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से यह अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोना न खरीदें। तब देशभर में सोने की खरीदारी को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। तब ज्यादातर लोगों का ध्यान या तो प्रधानमंत्री द्वारा इसे लेकर बताई जा रहे प्रत्यक्ष कारणों पर रहा या फिर विपक्ष द्वारा फैलाए गए इस बात पर रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के हो रहे युद्ध के परिणाम का आकलन करने में भी फल रहे इस बात पर रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्य करने का तरीका कुछ ऐसा रहा है जिससे प्रधानमंत्री के मन में क्या बात चल रही है, इसका लोगों को जल्दी पता ही नहीं चलता है।

मिडिल ईस्ट के युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से अगले 1 साल तक सोना ना खरीदने की अपील भी कुछ इसी प्रकार का है । ऊपरी तौर पर तो कई बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बता दी गई लेकिन इसके अलावा भी प्रधानमंत्री के मन में कुछ चल रहा है जिसका अभी खुलासा होना बाकी है। ऐसा नहीं होता तो जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की रात 8:00 बजे राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भारत में नोटबंदी की घोषणा एकाएक कर दी थी उस प्रकार से ही सोना बंदी की भी घोषणा कर देते। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया , सोना की खरीददारी बंद करने वाला कोई कानून नहीं बनाया और न ही ऐसा कोई सर्कुलर ही निकाला, बस सिर्फ लोगों से एक नैतिक अपील भर ही किया कि मिडिल ईस्ट युद्ध के परिणामों को देखते हुए लोग अगले 1 साल तक सोना नहीं खरीदें तो इसके अंदर भी कई राज छिपे हुए हैं। आज की इस खबर में प्रधानमंत्री के मन में छिपे ऐसे ही कुछ राज की भी जानकारी दी जाएगी,लेकिन उससे पहले एक बार फिर से दोहराते हैं उन बातों को जिसे प्रधानमंत्री ने लोगों से अगले एक साल तक सोना की खरीददारी नहीं करने की अपील करने के दौरान उजागर किया था।

विदेशी मुद्रा बचाना: भारत सोने का एक बड़ा आयातक (Importer) है। विदेशों से सोना खरीदने के लिए देश को अपना विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) खर्च करना पड़ता है।
वैश्विक संकट: पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि वे इस वैश्विक संकट के समय “आर्थिक देशभक्ति” दिखाएं और अनावश्यक खर्चों, विदेशी यात्राओं और शादियों में होने वाली खरीदारी को टालें ताकि ऐसे टालने वाले खर्चे को टालकर बचाये गए विदेशी मुद्रा भंडार से महंगी होने के बावजूद जरूरी पेट्रोलियम पदार्थ और गैस की खरीददारी की जा सके।

ऊपर बताए गए ये तमाम प्रत्यक्ष कारण तो महत्वपूर्ण है है ही लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में भारत में सोना को लेकर जो कुछ चल रहा है, वह इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।लेकिन इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई करवाई करने के पीछे पीएम मोदी को भी बड़ा होमवर्क करना पड़ेगा क्योंकि इस महत्वपूर्ण कारणों के पीछे बड़े-बड़े भ्रष्ट कारोबारी,ब्यूरोक्रेट्स और राजनेता लगे हुए हैं।

भारत में अनियंत्रित सोना का कारोबार : भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोने की खरीदारी करने के लिए आरबीआई ने एसबीआई, पीएनबी,आईसीआईसीआई,एक्सिस बैंक, एचडीएफसी समेत 17 बैंकों को अनुमति प्रदान की है।कहने को तो इन बैंकों से आम आदमी भी सोना खरीद सकता है, लेकिन बैंकों द्वारा इसे वापस खरीददारी न करने और बैंकों की अपनी प्रॉफिट नीति जैसे कई ऐसे कारण है, जिस कारण बैंक अपना ज्यादातर सोना लगभग 20-25 व्यापारिक घरानों को ही बेचती है, जो मनमाने तरीके से देश में सोने की कीमत को निर्धारित कर मुनाफा कमाते हैं।

सोने के कारोबारी के इन 20- 25 घरानों में से एक राजेश एक्सपोर्ट द्वारा सोने के मूल्य की हेरा फेरी कर अवैध कमाई करने वाला एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिससे पीएम मोदी के मन में सोना को लेकर और बड़ी कार्रवाई करने की जो सच है उसे बल मिला है।

सेबी (SEBI) ने देश की जानी-मानी कोगोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी कंपनी ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ और इसके चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ ₹15.15 लाख करोड़ के कथित फर्जी राजस्व और फंड हेराफेरी की अंतरिम जांच शुरू की है। यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। इस घोटाले से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:

फर्जी आय (Fake Revenue): नियामक SEBI का आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग ₹15.15 लाख करोड़ का कथित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर और फर्जी कारोबार दिखाया।अकाउंटिंग फ्रॉड: SEBI की रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनी ने ‘Affluence’ नामक जिस इकाई के साथ ₹11,000 करोड़ से अधिक का व्यापार (खरीद-बिक्री) दिखाया था, उस कंपनी ने ऐसे किसी भी लेनदेन से साफ इनकार कर दिया है।फंड का डायवर्जन: जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी का फंड कथित तौर पर प्रमोटर राजेश मेहता के निजी खातों में डायवर्ट किया गया और पर्सनल डेरिवेटिव ट्रेडिंग में इस्तेमाल किया गया।
कंपनी का पक्ष: आरोपों के सामने आने के बाद ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ ने वित्तीय गड़बड़ी और फंड डायवर्जन के आरोपों से इनकार किया है। चेयरमैन राजेश मेहता ने स्पष्ट किया है कि SEBI ने उनकी सब्सिडियरी कंपनी (Valcambi) के राजस्व को नहीं जोड़ा था और यह केवल एक “कम्युनिकेशन गैप” है।

सोने के इस बड़े कारोबारी के साथ देश में सोना को लेकर तस्करों का गिरोह भी सक्रिय है।हाल के दिनों में भारत में सोने के आयात शुल्क में भारी वृद्धि (6% से बढ़ाकर 15%) के कारण सोने की तस्करी में भारी उछाल आया है। अनुमान है कि अवैध रूप से लाए जाने वाले सोने की मात्रा 100 मीट्रिक टन (लगभग $14.35 बिलियन) को पार कर सकती है, जो कि 2025 में केवल 20.4 मीट्रिक टन थी।
सोने की तस्करी में इस खतरनाक वृद्धि के प्रमुख आंकड़े और कारण निम्नलिखित हैं:
तस्करी में उछाल (Trend): 2024 में जब सोने पर आयात शुल्क घटाकर 6% कर दिया गया था, तब अवैध आयात घटकर 69.2 टन और 2025 में 20.4 टन तक गिर गया था। लेकिन मई 2026 में ड्यूटी वापस 15% होने के बाद तस्करी में फिर से तेजी आ गई।भारी मुनाफा (Profit Margin): टैक्स के कारण तस्करी करने वालों (ग्रे-मार्केट) को प्रति किलोग्राम लगभग⁴ 25 लाख रुपये (लगभग $26,000) का भारी मुनाफा हो रहा है।तस्करी का तरीका (Methods): एयरपोर्ट पर कड़ी निगरानी के कारण तस्कर अब नए तरीकों (जैसे सोने को पेस्ट के रूप में छिपाना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में फिट करना) और जमीनी सीमाओं का अधिक उपयोग कर रहे हैं।कानूनी बाज़ार पर प्रभाव: तस्करी के कारण वैध आयातकों और रिफाइनरियों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि तस्कर कानूनी सोने से $200 प्रति औंस (लगभग 4% या उससे अधिक) कम दाम पर सोना बेच रहे हैं।

इन तमाम बिंदुओं पर नजर डालने से स्पष्ट हो जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोना की खरीददारी एक साल तक के लिए टालने को लेकर अपनी कहीं बातों से पी एम मोदी आम नागरिकों को नहीं बल्कि देश में सोने से जुड़े घोटालेबाज व्यापारिक घरानों और तस्करों को डराने के लिए की है।

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