पटना: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में विशेष पहल की गई। राजधानी पटना स्थित पटना जू में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि इसमें आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम में मंत्री ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेने का अवसर है।
हरित बिहार और स्वच्छ भारत के निर्माण का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझे, तो हरित बिहार और स्वच्छ भारत का सपना तेजी से साकार हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
बिहार में 5 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह ने बताया कि वर्ष 2026-27 में राज्य में हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि विभाग बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन की दिशा में काम कर रहा है। यह लक्ष्य बिहार को अधिक हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य में पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 10 पर्यावरणविदों को सम्मानित भी किया गया। मंत्री ने उन्हें स्मृति-चिह्न प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जैव विविधता परिषद के प्रतिनिधियों तथा पटना जू के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी भाग लिया।
पर्यावरण बचाने का संकल्प
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना होगा और प्रकृति के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाना होगा।

