रूसी तेल पर छूट खत्म करना चाहता है अमेरिका,भारत पर क्या होगा असर

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अमेरिका की वजह से भारत के रूसी तेल आयात पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह उन प्रतिबंधों में दी गई छूट को ‘जितनी जल्दी हो सके’ खत्म करना चाहता है जो भारत जैसे देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए दी गई थीं। सीनेट की विदेश नीति समिति के सामने गवाही देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने तर्क दिया कि ये उपाय ईरान युद्ध के बाद वैश्विक आपूर्ति को आसान बनाने के लिए सीमित समय के लिए लागू किए गए थे।

रूबियो ने समिति से कहा ‘हम इसे जितनी जल्दी हो सके खत्म करना चाहेंगे क्योंकि इस देश की मूल नीति उनके तेल पर प्रतिबंध लगाना रही है। ये छूटें सीमित समय के लिए हैं जिनका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति को और अधिक खोलना है।’ अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि प्रतिबंधों में दी गई यह छूट तेल की बढ़ती कीमतों के वैश्विक प्रभाव को कम करने का एक प्रयास था।

अमेरिका ने मार्च में रूसी तेल की खरीद पर लगे प्रतिबंधों से छूट दी थी और इसे दो बार बढ़ाया गया। आखिरी बार यह छूट 17 मई को एक महीने के लिए दी गई थी। भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली इस छूट का लाभ मिला है।

रूसी तेल पर अमेरिकी छूट खत्म होने का भारत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
भारत अपनी तेल की खपत का लगभग नौ-दसवां हिस्सा दूसरे देशों पर खरीदने पर निर्भर है। यूक्रेन में संघर्ष के बाद नई दिल्ली को मॉस्को के रूप में एक किफायती साझीदार मिला था जब पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने कच्चे तेल पर भारी छूट की पेशकश की। एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने भारत ने रूस से रिकॉर्ड तोड़ 2.3 मिलियन बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन आयात किया था। यह आयात प्रतिबंधों में मिली छूट के तहत कार्गो के लगातार आयात से संभव हो पाया था।

भारत अपनी तेल खपत का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है। रूस-यूक्रेन संकट और उसके बाद ईरान युद्ध के दौरान भारत ने रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रियायती तेल खरीदा है।
छूट खत्म होने से भारतीय रिफाइनरियों को मजबूरन अंतरराष्ट्रीय ‘स्पॉट मार्केट’ से ज्यादा कीमतों पर तेल खरीदना होगा जिससे भारत का कच्चा तेल आयात बिल काफी बढ़ जाएगा।
कच्चे तेल की खरीद लागत बढ़ने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर बोझ बढ़ेगा जिसके चलते आखिरकार घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतें बढ़ सकती हैं।

भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से रूस से तेल कम करता है तो उसे वापस मध्य पूर्व के देशों या ब्राजील और अमेरिका जैसे नए स्रोतों की तरफ रुख करना होगा।

जानकारों ने बताया है कि रूस से तेल का लगातार आयात जारी रखने से भारत को ईरान में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के दौरान पैदा होने वाले एक बड़े ऊर्जा संकट को टालने में मदद मिली है। यदि यह छूट समाप्त हो जाती है तो देश की तेल रिफाइनरियों को कहीं और से स्पॉट मार्केट से अधिक महंगा कच्चा तेल खरीदने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि नई दिल्ली ने लगातार यह रुख बनाए रखा है कि ऊर्जा की खरीद पूरी तरह से राष्ट्रीय हित, सामर्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर की जाती है। सरकार ने बार-बार इस बात के अपने अधिकार का बचाव किया है कि वह किसी भी ऐसे आपूर्तिकर्ता से तेल खरीद सकती है जो देश की जरूरतों को सबसे बेहतर ढंग से पूरा करता हो।

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