Bihar News: बिहार सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में मनरेगा (MNREGA) और VB-G RAM-G निधियों से बड़े पैमाने पर नहरों, उपवितरणियों और जल निकासी तंत्र की सफाई कराई जाएगी। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत 3,194 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है, जिन पर करीब ₹219.80 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
यह फैसला विकास आयुक्त बिहार मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि नहरों और उपवितरणियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण पानी अंतिम छोर यानी टेल एंड तक नहीं पहुंच पाता था। इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा था। अब नई योजना के तहत नहरों की डी-सिल्टेशन (गाद सफाई) और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा, जिससे सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और खेतों तक आसानी से पानी पहुंचेगा।
बिहार की सिंचाई व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बिहार की कुल संभावित सिंचाई क्षमता 53.53 लाख हेक्टेयर है, जबकि वर्तमान में उपयोगी सिंचाई क्षमता केवल 28.92 लाख हेक्टेयर तक सीमित है। सरकार अब इस अंतर को कम करने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने जा रही है।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में भी अब दूसरे राज्यों की तर्ज पर बड़े पैमाने पर नहरों और उपवितरणियों की सफाई कराई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून से पहले प्राथमिकता वाले कार्य तेजी से शुरू किए जाएं।
मनरेगा से मिलेगा रोजगार भी
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मनरेगा के जरिए स्थानीय मजदूरों को काम मिलेगा और साथ ही स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी होगा। सरकार ने जल संरक्षण, चौर क्षेत्रों से जल निकासी, तटबंध सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास को प्राथमिकता देने की बात कही है।
15 जून तक पूरी होंगी सभी औपचारिकताएं
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और उप विकास आयुक्तों को योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। विकास आयुक्त ने कहा कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं 15 जून तक पूरी कर ली जाएंगी ताकि मानसून से पहले तेजी से काम शुरू हो सके।
जनप्रतिनिधियों की भी होगी भागीदारी
सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में सांसद, विधायक, जिला परिषद और पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को जमीन पर उतारा जा सके।

