Bihar News: बिहार में पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान शुरू किया गया ‘खिलौना दान अभियान’ अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। राज्य की पंचायतों में लोगों ने बढ़-चढ़कर इस अभियान में हिस्सा लिया और आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए खिलौने दान किए। इस पहल का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक बाल-अनुकूल, जीवंत और सीखने योग्य बनाना है ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें और उनका मानसिक, सामाजिक व रचनात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सके।
इस अभियान का संचालन पंचायती राज विभाग और निजी संस्था सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज (C-3) द्वारा किया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों में बदला माहौल, बच्चों के चेहरे पर दिखी खुशी
खिलौना दान अभियान के बाद कई आंगनवाड़ी केंद्रों का माहौल पूरी तरह बदलता नजर आया। बच्चों को अब खेल के माध्यम से सीखने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी रुचि और सहभागिता दोनों बढ़ी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती उम्र में बच्चों के मानसिक और रचनात्मक विकास में खिलौनों की अहम भूमिका होती है। यही वजह है कि इस अभियान को शिक्षा और पोषण दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।
महिला जनप्रतिनिधियों ने निभाई अहम भूमिका
राज्य के कई जिलों में महिला जनप्रतिनिधियों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रोहतास, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और औरंगाबाद समेत कई जिलों में मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों ने आंगनवाड़ी केंद्रों में पहुंचकर बच्चों को खिलौने वितरित किए।
स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कर्मियों और आंगनवाड़ी सेविकाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया। गांव-गांव में लोगों ने स्वेच्छा से खिलौने दान कर इस पहल को सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया।
“Healthy Gram Panchayat” मॉडल को मिल रही मजबूती
यह अभियान स्थानीय सतत विकास लक्ष्य (LSDGS) की थीम-2 ‘स्वस्थ ग्राम पंचायत’ को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ बच्चों को खिलौने देना नहीं, बल्कि महिलाओं, बच्चों और पूरे समुदाय के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को प्राथमिकता देना है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की पहल गांवों में शिक्षा, पोषण और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दे सकती है।
पोषण पखवाड़ा 2026 में बिहार बना नंबर-1
पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान बिहार ने देशभर में शानदार प्रदर्शन किया। राज्य की पंचायतों में कुल 73 लाख 4 हजार 316 गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसके साथ बिहार पूरे देश में पहले स्थान पर रहा।
वहीं पोषण जन आंदोलन डैशबोर्ड पर 69 हजार 252 गतिविधियां दर्ज की गईं, जो यह दिखाती हैं कि पंचायत स्तर पर लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह समुदाय और पंचायतों की भागीदारी बनी रही तो आने वाले समय में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के लिए सिर्फ पोषण केंद्र नहीं, बल्कि शुरुआती शिक्षा और रचनात्मक विकास के मजबूत केंद्र बन सकते हैं।

