इन दिनों राजनीति में सत्ता के शीर्ष पद से इस्तीफा नहीं देने का चलन सा हो गया है। इस समय पश्चिम बंगाल का ऐसा ही एक मुद्दा चर्चा का केंद्र बिंदु बना हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधानसभा चुनाव में खुद के और अपनी टीएमसी पार्टी के विधानसभा चुनाव में हार जाने के बावजूद यह कहकर लोक भवन जाकर अपना इस्तीफा नहीं देने की बात कह रही हैं। वैसे भी उनका मुख्यमंत्रीत्व काल 7 मई तक है। इस मामले में आगे क्या कुछ हो सकता है, इस पर प्रकाश डालने से पूर्व मैं आपको ऐसे ही एक मुख्यमंत्री के इस्तीफा नहीं देने की जिद पर अड़ जाने की कहानी सुनाता हूं।आपको याद होगा जून 2024 की घटना जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर शराब घोटाले का आरोप लगा था और ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। लेकिन जेल जाकर भी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं दिया था और जेल से ही दिल्ली की शासन व्यवस्था चलाते रहे थे। शासन तो खैर किस प्रकार से चल रहा था, इसे आप सब लोगों ने भी मीडिया के जरिए देखा था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था।
अब बात ममता बनर्जी के यह कहते हुए लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देने की जिद पर अड़ जाने की कर लेते हैं जिसमें कहती हैं कि वे और उनकी पार्टी टीएमसी विधानसभा चुनाव में हारी नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम करते हुए उन्हें जबरन हराया है। उनके इस प्रकार से अड़ जाने के बाद चुनाव आयोग भी हरकत में आया और उसने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के पूर्ण हो जाने का नोटिफिकेशन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पास भिजवा दिया ताकि वे पश्चिम बंगाल में नई सरकार की गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर सकें।
चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन मिलने के साथ राज्यपाल 7 मई के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ कर देंगे और वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्यपाल ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने के लिए उन्हें गिरफ्तार करवा कर जेल में डलवा देंगे?
पश्चिम बंगाल में चुनाव हारने पर ममता बनर्जी बहुमत खो चुकी हैं। ऐसे में बहुमत खोने के बावजूद ममता बनर्जी की मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देने की जिद की वजह से पश्चिम बंगाल में संवैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है। हालांकि संविधान में ऐसे संवैधानिक संकट उत्पन्न होने पर उसकी निवारण की प्रक्रिया दी गई है लेकिन उसमें ऐसे संकट उत्पन्न करने वाले के लिए इस आधार पर जेल में डालने का कोई जिक्र नहीं है। लिहाजा इस मामले में ममता बनर्जी को सिर्फ मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा नहीं देने के आधार पर जेल में नहीं डाला जा सकता है। हां! इस मामले में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर वे राज्यपाल के द्वारा बर्खास्त जरूर की जा सकती हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत, मुख्यमंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं, और बहुमत न होने पर उन्हें हटाया जा सकता है।
चुनाव हारने के बावजूद पद पर बने रहना एक संवैधानिक संकट पैदा करता है, जिसे राज्यपाल अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट कर सकते हैं। लेकिन इस परिस्थिति में वहां राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा जिससे बीजेपी चुनाव में भारी बहुमत प्राप्त कर भी कुछ दिनों तक के लिए सट्टा सुख से वंचित हो जाएगी।
राज्यपाल बहुमत प्राप्त दल के नेता को नए मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त कर सकते हैं, जिससे पुरानी सरकार का कार्यकाल स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
यानी कुल मिलाकर स्थिति या बनती है कि ममता बनर्जी चाहे लोकभवन जाकर मुख्यमंत्री के पद से दिन या न दें वे अब मुख्यमंत्री नहीं रह सकती क्योंकि जनादेश बीजेपी के पक्ष में गया है और राज्यपाल के पास पर्याप्त शक्तियां हैं जिससे वे बीजेपी के विधायक दल के नेता को मुख्यमंत्री की पद की शपथ दिलाकर सत्ता सौंप सकते हैं। लेकिन राज्यपाल ऐसा करने के क्रम में ममता बनर्जी को जेल में नहीं डाल सकते हैं, लेकिन अगर पश्चिम बंगाल में नए मुख्यमंत्री के सत्तासीन होने के बाद भी ममता बनर्जी मुख्यमंत्री आवास खाली नहीं करेंगी या और दूसरे किसी प्रकार का अड़चन डालने का प्रयास करेंगी, तब बीजेपी के मुख्यमंत्री वाली सरकार जरूर उन्हें जेल में डाल सकती है।

