5 राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद नीतीश कुमार बीजेपी को लेकर चल सकते हैं बड़ा दांव

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हालिया विधानसभा चुनाव में मतदाता जमकर मतदान कर रहे हैं। तमिलनाडु और असम में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत 85% रहा, वहीं पश्चिम बंगाल में हुए प्रथम चरण के मतदान में मतदान का यह प्रतिशत 92% से भी कुछ ज्यादा हुआ,जिसने अब तक के चुनाव में हुए सारे मतदान प्रतिशतता को तोड़कर एक रिकॉर्ड बना दिया है। इस बंपर मतदान प्रतिशत को लेकर इन राज्यों में चुनाव लड़ रहे प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस,कम्युनिस्ट ,डीएमके, एआईडीएमके, बीजेपी और टीएमसी खासे उत्साहित हैं। अब इन राजनीतिक दल के नेताओं को 4 मई को इन राज्यों के आने वाले चुनाव परिणाम का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि यह चुनाव परिणाम उन्हें सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सकता है। लेकिन इससे अलग एक राजनीतिक दल ऐसा भी है जिसके नेता की नजर इस चुनाव परिणाम पर हैं, जबकि इसका कोई भी उम्मीदवार इन राज्यों में कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ रहा है। यह राजनीतिक दल है, जेडीयू और इसके नेता हैं नीतीश कुमार।
यह जानकर आपको आश्चर्य लग रहा होगा कि जब इस राजनीतिक दल का कोई भी उम्मीदवार इन राज्यों में कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ रहा है, तो फिर इन राज्यों के चुनाव परिणाम पर इस राजनीतिक दल के नेता की नजर क्यों टिकी हुई है?सरसरी तौर पर देखने पर भले ही यह बात आश्चर्यजनक लगती हो, लेकिन जब आप इस राजनीतिक दल जेडीयू के नेता नीतीश कुमार के क्रियाकलाप पर नजर डालेंगे, तब आपको भी लगने लगेगा कि यह कोई आश्चर्यजनक बात नहीं, बल्कि एक हकीकत है।

वर्ष 2025 ईस्वी में जब बिहार विधानसभा का चुनाव हो रहा था, तभी से बीजेपी जेडीयू खेमा के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर बीजेपी खेमा का मुख्यमंत्री बनना चाह रही थी, और इसके लिए वह चुनाव प्रचार के दौरान एनडीए की चुने हुए विधायकों के द्वारा बिहार का अगला मुख्यमंत्री होने की बात कह कर कुमार पर दबाव बनाने लगी थी। लेकिन चुनाव परिणाम आने तक जेडीयू के नेता नीतीश कुमार ने बीजेपी के इस दबाव को बिल्कुल खत्म कर दिया और खुद मुख्यमंत्री की कुर्सी हथिया ली। लेकिन बीजेपी इससे हतोत्साहित नहीं हुई और अपने अभियान में जुटी रही। इस बार इसने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के पद से हटाने के लिए एक नई चाल चली। इस बार यह नीतीश कुमार के खराब स्वास्थ्य की बात कह कर उन पर मुख्यमंत्री का कुर्सी छोड़ने के लिए दबाव बनाने लगी। बीजेपी की यह चाल कामयाब रही। इसके चाल के तहत इसने पहले पहले नीतीश कुमार को अंतरात्मा की आवाज करते हुए राज्यसभा में जाने के लिए राजी किया और फिर इनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद 14 अप्रैल को इन्हें बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया और 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के रूप में बिहार में बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री बनाने में सफलता प्राप्त कर ली।

यहां तक तो नीतीश कुमार बीजेपी के दबाव के आगे मजबूर रहे। लेकिन अब बीजेपी के ऊपर भी ऐसा ही बड़ा दबाव बनाकर उसे मजबूर करने में जुट गए हैं। पहले तो बीजेपी खेमा से मुख्यमंत्री बनाने के दौरान ही इन्होंने बीजेपी पर जबरदस्त दबाव बनाते हुए बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह को बीजेपी खेमें से ही सही लेकिन अपने मनपसंद सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए मजबूर कर दिया। और धीरे-धीरे सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री वाली बीजेपी के सरकार के मंत्रिमंडल के गठन को लेकर दबाव बनाकर मजबूर करने में जुट गए हैं। इसके लिए वह अपना एक-एक दांव बड़ी सावधानी से चल रहे हैं।

जब तक इन राज्यों के लिए हो रहे विधानसभा चुनाव का परिणाम नहीं आ जाता है, तब तक नीतीश कुमार बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह के ऊपर कोई दबाव नहीं बनना चाहते हैं, ताकि चुनाव परिणाम आने पर इनका दांव उल्टा ना पड़ जाए। इस क्रम में आज उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा सदन में लाए गए विश्वास मत के पक्ष में मतदान कर बीजेपी पर समर्थन का एक हल्का सा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।

वर्तमान समय में केरलम, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल तथा केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हो रहे विधानसभा चुनाव जिसका चुनाव परिणाम 4 मई को आने वाला है। सत्ता प्राप्ति के दृष्टिकोण से इन राज्यों का चुनाव परिणाम भले ही कोई मायने नहीं रखता हो, लेकिन इन राज्यों में बीजेपी की जीत या हार नीतीश कुमार के लिए बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह पर दबाव बनाने के दृष्टिकोण से बहुत मायने रखता है। इन चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा होता है तब नीतीश कुमार का बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह पर दबाव बनाने का तरीका कुछ हद तक समझौतावादी हो सकता है। और इसके तहत यह अपने मुख्यमंत्रित्व काल में बीजेपी के साथ हुए समझौते को उलट कर रख सकता है, जिसके तहत इन्होंने बीजेपी के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ अपनी पार्टी के दो उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और विजेंद्र यादव को शपथ ग्रहण करवा दिया है।

लेकिन अगर इन राज्यों का केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम में बीजेपी को अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता है,तब नीतीश कुमार बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह पर बड़ा दांव चलकर उन्हें इस कदर मजबूर करने का प्रयास कर सकते हैं कि हार पार कर अभी भले ही नहीं, लेकिन कुछ दिनों के बाद फिर से नीतीश कुमार को ही बिहार का मुख्यमंत्री बनाने के लिए मजबूर हो जाना पड़े। इसके तहत नीतीश कुमार बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह पर सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान न सिर्फ अपेक्षाकृत अधिक सीट का मांग कर सकते हैं, अपितु इसमें मलाईदार सीट का मांग कर भी उन्हें मजबूर कर सकते हैं।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चल रहा विधानसभा का चुनाव परिणाम अगर बीजेपी के पक्ष में नहीं रहा तो नीतीश कुमार के लिए पीएम मोदी और अमित शाह पर दबाव बनाना इसलिए भी बेहतर हो जाएगा, क्योंकि इससे पहले बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह के द्वारा सदन में प्रस्तुत करवाया गया नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम के निरस्त हो जाने के मामले में भी बीजेपी की बड़ी भद पीटी थी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के पश्चात नीतीश कुमार बीजेपी के रणनीतिकार पीएम मोदी और अमित शाह पर किस हद तक दबाव बनाकर उन्हें दोबारा इन्हें ही मुख्यमंत्री बनाने के लिए मजबूर कर पाते हैं या नहीं।

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