Jamui Rock Paintings: गिद्धेश्वर पहाड़ियों में मिले प्रागैतिहासिक चित्रों का होगा संरक्षण, रिसर्च के लिए भी खुलेंगे नए रास्ते

0
15

Bihar News: बिहार के जमुई जिले से इतिहास को लेकर एक बेहद खास और रोमांचक खबर सामने आई है। गिद्धेश्वर पहाड़ियाँ में मिले हजारों साल पुराने शैल चित्र अब सरकार की निगरानी में सुरक्षित किए जाएंगे। ये चित्र न सिर्फ प्राचीन मानव सभ्यता की झलक दिखाते हैं, बल्कि आने वाले समय में रिसर्च के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।

गिद्धेश्वर पहाड़ियों में छिपा है हजारों साल पुराना इतिहास

जमुई के वन क्षेत्र में स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ियों के रॉक शेल्टर में ये शैल चित्र वर्ष 2022 के आसपास खोजे गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार ये चित्र नवपाषाण काल से लेकर प्रारंभिक ऐतिहासिक काल तक के हो सकते हैं। इन चित्रों में उस दौर के लोगों की जीवनशैली, शिकार, पशुपालन और प्राकृतिक परिवेश की झलक साफ दिखाई देती है।

अब सरकार करेगी संरक्षण, रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

बिहार सरकार ने इन ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन शैल चित्रों का उपयोग शोध कार्यों के लिए भी किया जाएगा, जिससे प्राचीन सभ्यता को और बेहतर तरीके से समझा जा सके।

वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल के नेतृत्व में इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग किया गया है। उन्होंने बताया कि जल्द ही संरक्षण कार्य शुरू किया जाएगा।

क्या है नवपाषाण काल, क्यों हैं ये चित्र खास?

नवपाषाण काल को मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जब इंसानों ने पहली बार खेती, पशुपालन और स्थायी जीवन की शुरुआत की। यह काल लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व के बीच का माना जाता है।

उस समय लिखित भाषा नहीं थी, इसलिए लोग अपने अनुभव और जीवन को पत्थरों पर चित्रों के जरिए दर्शाते थे। यही वजह है कि ये शैल चित्र आज इतिहास का अनमोल दस्तावेज बन चुके हैं।

मानव और जानवरों के चित्र, समृद्ध संस्कृति का प्रमाण

सर्वेक्षण के दौरान कई स्थानों पर मानव आकृतियों और जंगली जानवरों के चित्र मिले हैं। ये इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि इस क्षेत्र में हजारों साल पहले भी मानव बस्ती मौजूद थी और यहां की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध रही है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित होगी धरोहर

वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शैल चित्रों को सुरक्षित रखने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल धरोहर को देख सकें और उससे सीख सकें।

इतिहास से जुड़े रहस्यों का खुलेगा नया अध्याय

इस खोज के बाद जमुई और आसपास का इलाका इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा केंद्र बन सकता है। यह पहल न केवल बिहार की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here