लखनऊ हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया है । कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार या तो ख़ुद जांच करे या सेंट्रल एजेंसी को रेफर करके जांच कराये। लेकिन ये आरोप जांच का विषय है। यह मामला रायबरेली ट्रायल कोर्ट से ख़ारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था। लखनऊ की सांसद विधायक अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता वाले मुद्दे का फैसला करने में सक्षम नहीं है।
याचिकाकर्ता कर्नाटक का एक भाजपा कार्यकर्ता है। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की थी। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, सरकारी गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट एक्ट के तहत गांधी के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं।
यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि उसके पास ब्रिटिश सरकार के सभी दस्तावेज और कुछ ईमेल हैं, जिससे साबित होता है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता मामले (Rahul Gndhi Dual Citizenship Case) में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच 21 अप्रैल को सुनवाई करेगी. गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 8 हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें चार हफ्तों का समय दिया है।
दरअसल 1 जुलाई 2024 को कर्नाटक के वकील और बीजेपी सदस्य एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता होने का भी आरोप लगाया था।
याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी पर यह आरोप ब्रिटिश सरकार के 2022 के गोपनीय मेल का हवाला देते हुए लगाया था। विग्नेश शिशिर ने भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9(2) के तहत राहुल की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की थी। इन दावों पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार को केंद्र सरकार को राहुल गांधी के खिलाफ दायर एक प्रतिवेदन पर अपना जवाब पेश करने के लिए और समय दे दिया। इस प्रतिवेदन में राहुल पर उनकी ब्रिटिश नागरिकता को कथित तौर पर छुपाने की वजह से उनके 2024 के संसदीय चुनाव को रद्द करने की मांग की गई है।
अदालत ने पिछले साल नवंबर में याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर केंद्र सरकार से उसके फैसले के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बाद, केंद्र सरकार के वकील ने बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर कार्रवाई करते हुए संबंधित मंत्रालय ने ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखकर राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है।उन्होंने कहा कि सरकार को गांधी के संसदीय चुनाव को रद्द करने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए समय चाहिए। वकील ने बताया कि इसलिए केंद्र सरकार ने बार-बार और समय मांगा है।
याचिका में विग्नेश शिशिर ने कहा कि राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को कथित तौर पर छुपाने की वजह से इसी साल रायबरेली लोकसभा सीट से उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया जाए। याचिकाकर्ता ने दलील देते हुए कहा कि उसके पास ब्रिटिश सरकार के सभी दस्तावेज और कुछ ईमेल हैं, जिससे साबित होता है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं। इस वजह से वह भारत में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं. लिहाजा वह लोकसभा सदस्य का पद नहीं संभाल सकते।
विग्नेश शिशिर ने याचिका में ये भी कहा कि उन्होंने दोहरी नागरिकता के बारे में सक्षम प्राधिकारी को दो बार शिकायतें भेजीं लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होने की वजह से उन्होंने वर्तमान याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट अधिनियम के तहत अपराध है, इसलिए CBI को मामला दर्ज करने और इसकी जांच करने का आदेश दिया जाना चाहिए.

