आंखों की रोशनी छीन सकती है डायबिटीज की यह दवा, नई रिसर्च में हुआ खुलासा

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डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एक दवा अब नए रिसर्च के बाद चर्चा में आ गई है। हालिया रिसर्च में संकेत मिला है कि यह दवा एक रेयर लेकिन गंभीर आंखों की समस्या का खतरा बढ़ा सकती है, जो स्थायी रूप से नजर कमजोर या खत्म भी कर सकती है।चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर क्या नई जानकारी निकल कर सामने आई है और कैसे क्यों यह दवा चर्चा में है।

डेनमार्क की साउथ डेनमार्क विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दो बड़े स्टडी में ओजेम्पिक की सुरक्षा का आकलन किया। यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ-साथ वजन घटाने में भी मदद करती है, जिसके चलते हाल के वर्षों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है।रिसर्च में जिस समस्या पर फोकस किया गया, उसे नॉन-आर्टेरिटिक एंटीरियर इस्केमिक ऑप्टिक न्यूरोपैथी (NAION) कहा जाता है।यह तब होती है जब आंख के ऑप्टिक नर्व तक ब्लड का फ्लो अचानक कम हो जाता है।ऑप्टिक नर्व आंख से दिमाग तक दृश्य जानकारी पहुंचाने का काम करता है, इसलिए इसके प्रभावित होने पर अचानक दृष्टि जा सकती है, जो कई मामलों में स्थायी होती है।

हालांकि NAION एक रेयर बीमारी है, लेकिन इसके गंभीर परिणामों के कारण डॉक्टर इसे बेहद गंभीरता से लेते हैं।मरीजों में एक आंख की रोशनी जा सकती है और कुछ मामलों में दूसरी आंख भी प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे की शुरुआत अमेरिका की एक छोटी स्टडी से हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ओजेम्पिक लेने से NAION का खतरा दोगुना तक बढ़ सकता है. अब डेनमार्क के बड़े स्तर पर किए गए स्टडी ने इस आशंका को और मजबूती दी है।

एक स्टडी में 4.24 लाख से ज्यादा टाइप 2 डायबिटीज मरीजों के डेटा का एनालिसिस किया गया, जिनमें करीब 1.06 लाख लोग Ozempic ले रहे थे। नतीजों में सामने आया कि इस दवा का इस्तेमाल करने वालों में NAION का खतरा अन्य दवाएं लेने वालों की तुलना में लगभग दोगुना था।रिसर्चर ने समय के साथ बदलाव भी नोट किया।2018 से पहले, जब इस दवा का उपयोग कम था, तब हर साल 60 से 70 NAION के मामले सामने आते थे।हाल के वर्षों में यह संख्या बढ़कर करीब 150 तक पहुंच गई है, और ज्यादातर मामले डायबिटीज मरीजों में देखे गए।

एक दूसरी स्टडी में नए मरीजों की तुलना अन्य दवाओं का उपयोग करने वालों से की गई, जिसमें भी यही पाया गया कि ओजेम्पिक लेने वालों में यह जोखिम करीब दोगुना था।हालांकि, एक्सपर्ट यह भी स्पष्ट करते हैं कि कुल मिलाकर यह जोखिम अभी भी कम है।ज्यादातर मरीजों को यह समस्या नहीं होती, और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के फायदे भी काफी महत्वपूर्ण हैं।

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