Middle East Tensions: भारत आ रहा ईरानी तेल टैंकर अचानक मुड़ा चीन की ओर, जानिये क्या है वजह?

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Middle East Tensions: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान से भारत के लिए रवाना हुआ एक तेल टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की ओर बढ़ गया है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारत लंबे समय बाद ईरान से तेल आयात की संभावनाएं तलाश रहा था। अगर यह खेप भारत पहुंचती, तो करीब सात साल बाद देश को ईरानी कच्चा तेल मिलता।

‘पिंग शुन’ टैंकर ने बदला रास्ता

इस टैंकर का नाम ‘पिंग शुन’ है, जो एक अफ्रामैक्स श्रेणी का जहाज है और साल 2002 में बनाया गया था। इस पर 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया था। शुरुआत में यह जहाज ईरान से गुजरात के वाडिनार पोर्ट के लिए कच्चा तेल लेकर निकला था, लेकिन यात्रा के दौरान इसने अपना गंतव्य बदल दिया। अब यह चीन के डोंगयिंग पोर्ट की ओर बढ़ता दिख रहा है।

पेमेंट की सख्त शर्तों ने बिगाड़ा खेल

विशेषज्ञों का मानना है कि टैंकर के रूट बदलने के पीछे भुगतान से जुड़ी समस्याएं अहम कारण हो सकती हैं। हाल के दिनों में तेल खरीद से जुड़ी शर्तों को और सख्त कर दिया गया है। अब खरीदारों को 30 से 60 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा, जिससे सौदा करना पहले के मुकाबले मुश्किल हो गया है। यही वजह है कि भारत के लिए यह डील अटकती नजर आ रही है।

खरीदार और विक्रेता पर बना सस्पेंस

इस पूरे मामले में यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि इस कच्चे तेल का खरीदार कौन था और इसे बेचने वाला कौन था। हालांकि यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब भारतीय रिफाइनरियां समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के कार्गो खरीदने के अवसर तलाश रही थीं।

अमेरिकी छूट, लेकिन समय कम

अमेरिका ने ईरान से तेल खरीद पर 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी, जो 19 अप्रैल तक लागू है। इस छूट से भारत समेत कई देशों को खरीद का मौका मिला, लेकिन कम समय और कड़े नियमों के कारण सौदे को अंतिम रूप देना चुनौतीपूर्ण बन गया है।

SWIFT से बाहर ईरान, भुगतान बना सबसे बड़ा संकट

ईरान अभी वैश्विक बैंकिंग सिस्टम SWIFT से बाहर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना काफी कठिन हो गया है। यही कारण है कि कई देशों के लिए ईरानी तेल खरीदना जोखिम भरा और जटिल बना हुआ है।

भारत पर क्या होगा असर?

इस घटनाक्रम से भारत की ऊर्जा रणनीति पर असर पड़ सकता है। सस्ते ईरानी तेल की संभावनाएं फिलहाल कमजोर पड़ती दिख रही हैं, जबकि चीन इस स्थिति का फायदा उठाता नजर आ रहा है।

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