इंटरनेट के दौर में निजी तस्वीरों और वीडियो के जरिये ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई बार साइबर अपराधी लोगों को उनकी प्राइवेट फोटो या वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में मानसिक दबाव इतना बढ़ जाता है कि कुछ लोग गलत कदम तक उठा लेते हैं।अब इस तरह की धमकियों से निपटने के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने एक आसान और सुरक्षित तरीका साझा किया है।
जागरूकता अभियान Cyber Dost के माध्यम से बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति आपकी निजी फोटो या वीडियो को इंटरनेट पर डालने की धमकी देता है तो घबराने की जरूरत नहीं है।ऐसी सामग्री को ऑनलाइन फैलने से पहले ही रोका जा सकता है।इसके लिए एक खास डिजिटल प्रक्रिया अपनानी होती है जो पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें आपकी असली फोटो या वीडियो कहीं अपलोड नहीं होती।
इस प्रक्रिया के तहत यूजर को StopNCII.org नाम की वेबसाइट पर जाना होता है।यहां आपकी निजी इमेज या वीडियो का एक डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार किया जाता है जिसे हैश कोड कहा जाता है।यह कोड आपकी फाइल का एक यूनिक डिजिटल पहचान नंबर होता है।
खास बात यह है कि यह पूरा प्रोसेस आपकी अपनी डिवाइस पर ही होता है जिससे आपकी मूल तस्वीर या वीडियो वेबसाइट पर अपलोड नहीं होती और गोपनीयता बनी रहती है।
जब यह डिजिटल कोड बन जाता है तो इसे उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा किया जाता है जो इस पहल से जुड़े हैं. अगर वही तस्वीर या वीडियो कहीं अपलोड करने की कोशिश की जाती है तो सिस्टम उसे पहचान कर ब्लॉक कर देता है।यदि पहले से कोई कंटेंट मौजूद हो तो उसे हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस प्लेटफॉर्म के साथ Meta, TikTok और Snapchat जैसे बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क जुड़े हुए हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि लोग डर या शर्म के कारण अपराधियों के आगे झुकने के बजाय कानूनी और तकनीकी मदद लें।अगर कोई आपको निजी सामग्री के नाम पर ब्लैकमेल कर रहा है तो पैसे देने या घबराने के बजाय तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और इस डिजिटल सुरक्षा प्रक्रिया का सहारा लें. सही जानकारी और सतर्कता के साथ ऐसी धमकियों को प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है.
