सलमान खान पहुंचे संघ की शरण में ,मोहन भागवत ने सबसे बड़ी गलतफहमी दूर कर दी

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बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में पहुंचे तो रील और तस्वीरें कुछ ज्यादा ही वायरल हुईं।सलमान का कार से निकलने और जाने का अंदाज शेयर हो रहा है, लेकिन अंदर क्या-क्या हुआ।संघ की यात्रा के 100 साल पर मुंबई में आयोजित इवेंट में संघ प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन हुआ। सलमान खान आगे की पंक्ति में कवि और लेखक प्रसून जोशी के साथ बैठे थे। वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ तो सलमान सबके साथ खड़े रहे।बाद में संघ प्रमुख का संबोधन शुरू हुआ तो वह बड़े ध्यान से उन्हें सुनते रहे।इसी दौरान मोहन भागवत ने एक बड़ी गलतफहमी भी दूर करने की कोशिश की।सलमान को संघ के कार्यक्रम में देख कई लोगों ने लिखा- बॉलीवुड बदल रहा है।

भागवत ने कहा कि सागर जैसी विशाल वाटर बॉडी कोई दूसरी नहीं है। राम-रावण जैसा युद्ध एक ही हुआ। संघ को बहुत बार लोग, कई संगठन और पार्टी के साथ बिठाकर देखना चाहते हैं तो गलतफहमी होती है। संघ को ऊपर-ऊपर और दूर से देखेंगे तो भी गलतफहमी होती है। क्योंकि आप हमारे कार्यक्रमों को देखते हैं। कुर्ता-पायजामा पहनकर यहां मैं आपके सामने बैठा हूं। कल ये बदलकर दूसरा पहनूंगा तो आप मेरे कपड़ों को जानेंगे।आदमी को जानना है तो थोड़ा और अंदर जाकर विचार करना पड़ेगा। उन्होंने समझाते हुए कहा कि ऐसे ही संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च (संचलन) करते हैं लेकिन संघ पैरामिलिट्री ऑर्गनाइजेशन नहीं है।

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक लाठी सीखते हैं लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय अखाड़ा नहीं है। संघ में घोष की धुनें बजती हैं, व्यक्तिगत गीत होते हैं लेकिन संघ कोई अखिल भारतीय संगीतशाला नहीं है।संघ के स्वयंसेवक राजनीति में भी हैं लेकिन संघ कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं है।कई बातें ऊपर से देखेंगे तो गलतफहमी होगी। इसलिए संघ को जानना है तो संघ का अनुभव लेना जरूरी है।संघ को आकर अंदर से देखना।

भागवत ने कहा कि इसलिए फिर 100 साल के बाद हम आपको बता रहे हैं कि संघ क्या है।क्योंकि संघ का काम संघ के लिए नहीं, देश के लिए है, भारतवर्ष के लिए है।संघ को जानना है तो पहले जानना चाहिए कि संघ क्या नहीं है।उन्होंने कहा-

– संघ किसी दूसरे संगठन के कॉम्पटीशन से निकला नहीं और न ही है।
– संघ किसी एक विशिष्ट परिस्थिति की प्रतिक्रिया में नहीं चला है।
– संघ किसी के विरोध में नहीं चला है।
– संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए।
– संघ को पावर नहीं चाहिए।
– संघ चला है, जितने भी भले काम हो रहे हैं, और आगे भी होंगे, वो ठीक से पूरे हो जाएं इसलिए जो होना चाहिए वो करने के लिए संघ है।

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