निर्मला सीतारमण ने दी बड़ी जानकारी, बताया कैसे GST के दायरे में लाया जाए पेट्रोल-डीजल

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जीएसटी स्लैब में हुए सुधार के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि महंगाई के कंट्रोल करने के लिए सरकार हमेशा प्रयास करती है।उन्होंने कहा कि इस नवरात्रि के पहले दिन से ही जनता कम रेट होने की वजह से ज्यादा सामान खरीद सकेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (3 सितंबर 2025) को साफ किया कि अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी के रहेंगे, जबकि हानिकारक और सुपर लग्जरी सामानों पर स्पेशल 40 फीसदी टैक्स लगेगा।
इस में सुधार को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये सुधार आम आदमी को ध्यान में रखकर किए गए हैं।आम आदमी के दैनिक उपयोग की चीजों पर लगने वाले हर टैक्स की समीक्षा की गई है और ज्यादातर मामलों में दरों में भारी कमी आई है। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र को भी लाभ होगा।

मीडिया के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (5 सितंबर 2025) को बताया कि 300 से अधिक गुड एंड सर्विसेस के रेट कम होने वाले हैं। इस दौरान उन्होंने पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल जीएसटी के इस प्रपोजल में शामिल नहीं थे। जीएसटी लाने के समय भी हमने एक लीगल प्रोविजन बनाया था कि अगर राज्य रेट को लेकर तैयार हो जाएंगे तो पेट्रोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जा सकेगा
पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकार ईंधन पर टैक्स लगाती है। इस पर हर राज्य अलग-अलग टैक्स लगाता है, क्योंकि राज्य अलग-अलग सेल्स टैक्स या वैट अमाउंट लगाता है। अगर ये जीएसटी के दायरे में आ जाती हैं तो राज्यों का अपने टैक्स के ढांचे पर कंट्रोल कम हो जाएगा। यदि पेट्रोल-डीजल को GST के अधिकतम स्लैब 40 फीसदी में भी लाया जाता है तो भी वर्तमान रेट की तुलना में इसके दाम कम हो जाएंगे। पेट्रोल-डीजल पर 50 फीसदी से ज्यादा तो टैक्स ही चला जाता है।

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