अक्सर कहा जाता है कि ये काम महिलाओं के बस का नहीं, लेकिन हकीकत तो ये है कि अगर मौका मिले तो महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं. फिर चाहे वो सेना का फाइटर प्लेन उड़ाने की बात हो या बस ड्राइवर बनने की. जी हां आपने ठीक सुना उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में यूपी रोडवेज बस को पहली महिला बस ड्राइवर मिली है्। प्रियंका शर्मा तमाम संघर्षों को मात देकर यूपी रोडवेज की पहली महिला ड्राइवर बनीं हैं. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन द्वारा नियुक्त 26 महिला ड्राइवरों में से प्रियंका भी एक हैं. प्रियंका के पति का निधन शराब पीने के कारण जल्दी हो गया था. इसके बाद दो बच्चों को पालने की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी.
अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए वो कहती हैं कि मेरे पति की मृत्यु के बाद, मेरे बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी. मैं बेहतर अवसरों के लिए दिल्ली शिफ्ट हो गई. शुरुआत में मुझे एक कारखाने में हेल्पर के रूप में नौकरी मिली. लेकिन बाद में मैंने ड्राइविंग कोर्स में एडमिशन लिया. ड्राइविंग कोर्स करने के बाद मैं मुंबई चली गई. इसके बाद बंगाल और असम के साथ-साथ कई राज्यों की यात्रा भी की।
आपको बता दें कि प्रियंका बिहार के बांका जिले के हरदौड़ी गांव की रहने वाली हैं. उनका साल 2002 में राजीव नाम के व्यक्ति से विवाह हुआ था. उनके दो बेटे हैं. ड्राइविंग कोर्स करने के बाद उन्होंने पहले ट्रक चलाने का फैसला लिया. पहले तो वो हेल्पर के रूप में काम करने लगीं, लेकिन बाद में वो ट्रक चलाने लगीं. हालांकि उनका ट्रक चलाना प्रियंका के माता पिता और भाइयों को पसंद नहीं आया. इसके कारण उन्होंने प्रियंका से दूरी बना ली. बाद में उन्होंने बस चलाने का फैसला लिया. और अब वह यूपीएसआरटीसी में पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं. जिस काम को सिर्फ पुरुषों का काम कहा जाता है उसमें प्रवेश कर प्रियंका ने सिद्ध किया कि बेटियां सब कर सकती हैं।

