कोलकाता (बीरेंद्र कुमार): प्रख्यात अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा कि विभिन्न समुदाय के लोगों के बीच भयावह गलतफहमियां को दूर करने के लिए विश्वास बनाने की जरूरत है। इनमें से कुछ मतभेदों को अज्ञानता और निरक्षरता ने जन्म दिया है।
वे अपने ट्रस्ट प्रतिची द्वारा नो यू नेवर नाम के एक संगठन के साथ मिलकर स्कूलों स्कूली बच्चों के लिए आयोजित एक निजी समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता आए हैं।
सामाजिक मतभेद के लिए अज्ञान और अशिक्षा को बताया जिम्मेवार
कार्यक्रम में शिरकत करते हुए अमर्त्य सेन ने कहा कि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां धर्मों के बीच भयावह गलतफहमियां बेहद आम हैं। हमारे बीच हर तरह के मतभेद हैं। कुछ मतभेद अशिक्षा और अज्ञानता की वजह से है। हमें समाज में विश्वास बनाने की जरूरत है। अगर एक मुस्लिम सज्जन हमसे अलग राय रखता है तो हमें यह सवाल पूछने की जरूरत है कि वह अलग नजरिया क्यों अपना रहा है!
एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के विचार भिन्न हो सकते हैं इसे बताने के लिए उन्होंने एक घटना का उल्लेख किया कि जब वह अपनी बेटी अंतरा को एक स्कूल में दाखिले के मकसद से साक्षात्कार के लिए ले गए थे और एक प्रश्न पूछे जाने पर उन्होंने याद किया कि जब शिक्षक ने अंतरा से रंगों की पहचान कराने के उद्देश्य से लाल और नीली और पीली रंग की पेंसिल दिखाई तो वे बहुत हताश थे। जब वे बाहर आए तो उसकी 5 वर्षीय बेटी ने कहा कि बाबा इनको कुछ समस्या है? क्या क्या या रंग नहीं पहचान पाते?
कई बार हमारी एक दूसरे को समझने की क्षमता असाधारण रूप से सीमित होती है। हम अलग दिशा में चले जाते हैं । जैसे अंतरा को लग रहा था कि यह सवाल किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है जो वर्णांध है यानि रंगों की नहीं पहचान पाते है।अपनी बातचीत के दौरान प्रोफेशन ने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बार-बार युक्त साधना यानि एक साथ काम करने की आवश्यकता है। इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें हमेशा संपर्क की तलाश करना चाहिए। जरूरी नहीं कि हमारा संपर्क हर समय किसी गंभीर मुद्दे पर ही हो , संपर्क छोटे-छोटे मामलों में भी बनाया जा सकता है।

