अखिलेश अखिल
नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए को लेकर कई तरह की बातें राजनीतिक गलियारों में की जा रही है। इसको लेकर देश के भीतर ही हर समाज के लोगों के बीच अलग -अलग तरह के भ्रम भी फैलाये गए हैं लेकिन सच तो यही है कि सीएए से किसी को नुकसान नहीं है। देश के मुसलमानो को तो कतई नहीं। और इस कानून से मुसलमानो को भी नहीं डरना चाहिए। यह देश हर मुसलमानो का है।
यह देश जितना समाज के अन्य धर्मालम्बियों का है उतना ही यह देश मुसलमानो का भी है। हिन्दू और मुसलमानो ने मिलकर ही इस देश का निर्माण किया है। उसके खून से ही इस देश को सींचा गया है।
लेकिन कहानी इतनी भर की नहीं है। जाहिर है चुनाव के वक्त में केंद्र सरकार ने जिस तरह से इसे लागू किया है उसके पीछे राजनीतिक सोंच और समझ ही है। बीजेपी को पता है कि इस देश के अधिकतर मुस्लिम उसे वोट नहीं देते और यही वजह है कि सीएए को लाकर बीजेपी ने ध्रुवीकरण की राजनीति का खेल किया है। बीजेपी को पता है कि इस खेल के जरिये समाज में हिंदुत्व की भावना को फिर से जागृत किया जा सकता है। लेकिन जो समझदार है वह इस खेल को समझ भी रहे हैं।
केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद जहां कई राज्यों में इसका विरोध हो रहा है तो कई संगठन इसके समर्थन में भी हैं। ऐसे में अब सरकार को एक मुस्लिम संगठन का साथ मिला है। राष्ट्रीय मुस्लिम महासभा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह एक बेहतर कानून है।
महासभा के अध्यक्ष सैयद साहेब आलम ने कहा कि कानून के लागू होने से हमें कोई परेशानी नहीं है। दूसरे देशों से प्रताडि़त होकर भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता मिलती है तो यह अच्छी बात है। आलम ने आगे कहा कि मुसलमानों को सीएए से डरने की जरूरत नहीं है। इस कानून से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह एनआरसी के नाम पर मुसलमानों के बीच डर पैदा किया जा रहा था, वैसा ही डर सीएए को लेकर पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान एनआरसी का खुलकर विरोध कर रहा है, न की सीएए का।
सीएए की अधिसूचना जारी होने के बाद जमात-ए-इस्लामी-हिंद ने इसका खुलकर विरोध किया था। संगठन के अध्यक्ष नाजीमुद्दीन ने कहा था कि इस अधिनियम को लागू कर केंद्र सरकार लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। इस साल लोकसभा चुनाव होने हैं और सरकार का पूरा ध्यान इसपर है कि किस तरह समाज को बांट कर चुनाव जीता जाए।
भाजपा विकास के मुद्दों से ध्यान हटाकर धार्मिक मुद्दों पर चुनाव लड़कर जीत हासिल कर फिर से सत्ता में आना चाहती है। सरकार ने नारा दिया था ‘सबका साथ, सबका विकास’, जो खोखला साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 11 मार्च को नागरिक संशोधन विधेयक को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया था।
नोटिफिकेशन जारी होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बयान जारी कर कहा था कि इस विधेयक से किसी को डरने की जरूरत नहीं है, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के जरिए लोगों को नागरिकता दी जाएगी, न की किसी की नागरिकता छिनी जाएगी। हालांकि, विधेयक में कई खामियां बताते हुए कई राजनैतिक दल और संगठन इसके विरोध में उतर आए हैं।
