केंद्र सरकार की एचईसी तबाही के कगार पर ,1600 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका 

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न्यूज़ डेस्क 
रांची स्थित भारत सरकार की बड़ी औद्योगिक कंपनी एचईसी तबाही के कगार पर पहुँच गई है। आलम ये है कि यहाँ काम कर रहे 1600 से ज्यादा कर्मचारियों की जिंदगी तबाह हो गई है। न उन्हें कोई वेतन मिल रहा है और न ही उनके परिजनों को दो जून का भोजन मिल रहा है। उनके बच्चों की पढाई भी ठप हो चुकी है।  

संपूर्ण भारत क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह झारखंड छत्तीसगढ़ प्रभारी विजय शंकर नायक ने कहा कि एचईसी मजदूरो की आर्थिक स्थिति 18 महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण बद से बतर हो गई है और उनके बच्चे को शिक्षा लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

नायक ने कहा कि मजदूरों के परिवार में बीमार लोगों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है वह ठीक से 2 जून का भोजन भी नहीं कर पा रहे है । सेवानिवृत कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और लीव सैलेरी का भुगतान 5 साल से बंद है ।

नायक ने कहा कि आज एचईसी के मजदूरों का पीएफ का भुगतान भी नहीं किया जा रहा तो दुसरी ओर ठेका पर काम करने वाले मजदूरों का ठेका भी समाप्त हो गया जिस कारण 1600 मजदूरों का भी भविष्य खतरे में है । इन सभी मजदूरों ने इस संदर्भ में एचईसी प्रबंधन को कई बार ध्यान आकर्षित कराया लेकिन वेतन भुगतान करने की दिशा में एवं अन्य बिंदुओं पर एचईसी के द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की गई जो इन मजदूरों के साथ अन्याय और शोषण है जिसे संपूर्ण भारत क्रांति पार्टी कदापि बर्दाश्त नहीं करेगी ।

नायक ने कहा कि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में आई है तबसे जानबूझकर एचईसी के प्रति उदासीनता दिखाकर बंद करने में लगी हुई है। केंद्र के द्वारा षड्यंत्र किया जा रहा है कि एचईसी को किसी भी हालत में बंद करके उसे अपने समर्थक उद्योगपतियों के हाथ बेचने का । षड्यंत्र कर करोड़ो अरबो की परती पड़ी भूमि को हथियाना का प्रयास किया जा रहा है जिसे एचईसी नगर वासी कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे और एचईसी को बचाने के लिए हर वह कदम उठाने को मजबुर होंगे जिससे कि एचईसी बच सके ।

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