अखिलेश अखिल
22 जनवरी की तारीख नजदीक आ रही है। देश में उमंग का माहौल है। उमंग इसलिए कि देश के आराध्य प्रभु राम को उनको घर मिल रहा है। वैसे तो राम घट =घाट के वासी है। वे कहाँ नहीं है ? वे सबमे है और सबके जो हैं। कोई माने या न माने वे तो सबको अपना ही मानते हैं। सनातनी परंपरा में प्रभु राम भगवान् विष्णु के अवतार हैं और त्रेता युग में अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर उनका जन्म हुआ था। लेकिन सबसे बड़ा सच यही है कि वह देश के आराध्य हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। गरीबो के नाथ हैं। करुणा के सागर हैं।
अयोध्या में हलचल है। रोमांच है। पूरी दुनिया की नजर आज अयोध्या पर टिकी है। इस धारा पर जहाँ भी सनातनी हैं वे प्रभु राम के दर्शन को आतुर हैं ,व्याकुल हैं। 22 जनवरी को मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है। मंदिर में जो मूर्ति स्थापित की जाएगी उसका भी चयन हो चुका है। इस मूर्ति की भव्यता बेजोड़ है।
आज यह खबर सामने आयी कि कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज की मूर्ति रामलला के दरबार में विराजेगी। अरुण रोजाना 18 घंटे काम करते थे, करीब सात महीने में उन्होंने रामलला की अचल मूर्ति गढ़ी है। सात महीने के कठिन परिश्रम ने अरुण योगीराज का मान आज पूरे विश्व में बढ़ा दिया है।
अरुण योगीराज मूलत: कर्नाटक के मैसूर से हैं। उनके परिवार में एक से बढ़कर एक मूर्तिकार रहे हैं। उनकी पांच पीढि़यां मूर्ति बनाने या तराशने का काम कर रही हैं। अरुण योगीराज के दादा बसवन्ना शिल्पी भी जाने-माने मूर्तिकार थे। उन्हें मैसूर के राजा का संरक्षण हासिल था।अरुण को बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक था। अरुण ने एमबीए किया है। इसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन मूर्तिकला को नहीं भूल पाए।
कहा जा रहा है कि इस चयनित मूर्ति की कई खूबियां हैं। सबसे बड़ी खूबी तो यही है कि यह मूर्ति श्याम शिला की बनाई गई है। यह मूर्ति हजारों साल तक चलेगी। यह जलरोधी भी है। अगर आप इस मूर्ति पर चाँद ,रोली भी लगाते हैं तो भी इसकी चमक कम नहीं होगी। यह मूर्ति 51 इंच की है। इसका वजन 150 से 200 किलो का है। इस मूर्ति के ऊपर मुकुट और आभामंडल होगा। प्रभु राम की भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं। मस्तक सुन्दर ,आँखे बड़ी और ललाट भव्य है। कमलदल पर मूर्ति खड़ी है और हाथ में तीर और धनुष भी है। इस मूर्ति में पांच साल की बाल सुलभ कोमलता भी झलक रही है।

