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Mohammed shami: बुरे वक्त को मात देकर हीरो बने मोहम्मद शमी, कभी आता था सुसाइड का ख्याल अब रच रहे नया इतिहास

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विकास कुमार
मोहम्मद शमी ने अपने शानदार प्रदर्शन से एक सौ 40 करोड़ भारतीयों का दिल जीत लिया है। अभी सभी भारतीयों की जुबान पर केवल मोहम्मद शमी का नाम है। मोहम्मद शमी ने वर्ल्ड कप 2023 में अब तक कमाल का प्रदर्शन किया है। पहले सेमीफाइनल में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 7 विकेट लेकर टीम इंडिया को 70 रन से यादगार जीत दिलाई है। अगर शमी ने विकेट नहीं लिए होते तो न्यूजीलैंड ये मैच में बाजी पलट भी सकता था। शमी वनडे के इतिहास में 7 विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार भी मिला।

ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या के चोटिल होने के बाद वे आए और छा गए। वे अब तक 6 मैच में 9 की औसत से 23 विकेट ले चुके हैं। शमी ने तीन बार 5 विकेट झटके हैं। वे वर्ल्ड कप में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं। शमी के प्रदर्शन से उनके गांव में भी जश्न का माहौल है।

मोहम्मद शमी ने ये सफलता बड़े कठिन संघर्ष के बाद हासिल की है। उनकी जिंदगी से हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए। एक दौर था जब शमी का बहुत बुरा वक्त चल रहा था। चारों तरफ से उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। एक समय ऐसा था कि शमी ने तीन-तीन बार सुसाइड करने की ठान ली थी। ये वो समय था जब शमी 2015 वर्ल्ड कप के बाद चोट से वापसी कर रहे थे और उनकी पर्सनल लाइफ में बहुत उथल-पुथल मची हुई थी लेकिन उनके किस्मत में कुछ और ही लिखा था। परिवार का साथ और अपने ईमानदारी भरे जज्बे से शमी ने बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है।

2020 में रोहित शर्मा के साथ इंस्टाग्राम लाइव में शमी ने सुसाइड का ख्याल आने वाली बात का खुलासा किया था उन्होंने कहा था कि मैं 2015 वर्ल्ड कप में चोटिल हो गया था। इसके बाद टीम में वापसी करने में मुझे 18 महीने लगे और वह मेरे जीवन का सबसे मुश्किल दौर था। आप जानते हैं कि रिहैब कितना मुश्किल होता है और उसके बाद पारिवारिक समस्याएं। ये सब चल रहा था और इसी बीच आईपीएल से 10-12 दिन पहले मेरा एक्सीडेंट हो गया। मीडिया में काफी कुछ चल रहा था मेरे निजी मुद्दों को लेकर,मुझे लगता है कि अगर मेरे परिवार का साथ मुझे नहीं मिलता तो मैं क्रिकेट छोड़ देता। मैंने तीन बार खुदकुशी करने के बारे में भी सोचा था, मेरे परिवार में से किसी को मुझ पर नजर रखने के लिए मेरे पास बैठना होता था। मेरा घर 24वीं मंजिल पर था और उन्हें लगता था कि मैं कहीं अपार्टमेंट से कूद न जाऊं।

बुरे वक्त से निकलकर शमी खेल के मैदान में अब शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। शमी के जीवन से हम ये सीख सकते हैं कि उतार और चढ़ाव जीवन का हिस्सा है। अगर हम ईमानदारी से अपने काम पर फोकस रखें तो बुरे वक्त को मात देकर एक दिन इतिहास जरुर रच सकते हैं।

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