पांच किलो फ्री अनाज और आटे पर नाचता लोकतंत्र 

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न्यूज़ डेस्क

लोकतंत्र नाच रहा है या नचाया जा रहा है यह कौन जानता है ? देश गरीब है या गरीब रखा जा रहा है यह भी तो कोई नहीं जानता। लेकिन देश असली सच तो यही है कि इस देश की 80 करोड़ जनता पांच किलो अनाज फ्री में पाकर नाच रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी जनता की यह कमजोरी जान ली है। पीएम जान गए हैं कि महंगाई चरम पर है। वे यह भी जान गए हैं कि उनके खेल को भी जनता समझ रही है। इसलिए जब भी विपक्ष उनपर अटैक करता है तो बात पांच किलो फ्री अनाज पर आती है। चुनाव में सभी दाल रेवड़ियां बात रहे हैं ऐसे में बीजेपी की तरफ से देश का सबसे बड़ा रेवाड़ी पीएम मोदी ने ही बांटने का ऐलान किया। पांच साल तक पांच किलो अनाज देश वासियों के बीच चलता रहेगा। देश मुग्ध। जयकारे लगे और सब  कुछ शांत। बीजेपी को इन पांच राज्यों के चुनाव में बड़े लाभ होने वाले हैं।    
  अब एक और बड़ा मास्टर स्ट्रोक। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और त्यौहारी सीजन को देखते हुए भारत सरकार ने एक और  कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सभी जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत सरकार का सबसे ज्यादा फोकस आटे पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब सब्सिडीयुक्त आटा 27.50 रुपये प्रति किलो की दर से बेचेगी।
      भारत आटा नेफेड और एनसीसीएफ जैसी सहकारी संस्थाओं के माध्यम से ये आटा बेचेगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसका लाभ उठा सके। साथ ही महंगाई से निपटने के लिए सरकार ने आटे की कीमत 29.5 रुपये से घटाकर 27.5 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी है।
      ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत भारतीय खाद्य निगम सरकारी पूल से आटा मिल मालिकों और छोटे व्यापारियों जैसे थोक खरीदारों को गेहूं व चावल बेचता है। यह साप्ताहिक ई-नीलामी प्रणाली इन वस्तुओं की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करके खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करती है। एफसीआई की ओर से ई-नीलामी के 19वें दौर में 2,389 बोलीदाताओं को 2.87 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचा गया है।
        रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सरकार के मुफ्त खाद्यान्न कार्यक्रम को पांच साल तक बढ़ाने का ऐलान किया था। इस योजना का लक्ष्य 80 करोड़ लोगों को अनाज की बढ़ती कीमतों से बचाना है। हालांकि, इस विस्तार कार्यक्रम को बनाए रखने के लिए सरकारी खर्च में वृद्धि और किसानों से गेहूं व चावल की खरीद की जरूरत होगी।
      मुफ्त अनाज  कार्यक्रम से सरकार पर सालाना करीब 2 लाख करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। साथ ही बता दें कि भारत दुनिया में गेहूं और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत में पहले ही अनाजों के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू कीमतों को स्थिर करना और आबादी के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

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