Homeदेशएक देश एक चुनाव की तैयारिया और उलझनें

एक देश एक चुनाव की तैयारिया और उलझनें

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बीरेंद्र कुमार झा

एक देश एक चुनाव को लेकर विधि आयोग की तैयारी का दौर जारी है।खबर है कि इस बीच भारत निर्वाचन आयोग यानी (ECI) ने नई व्यवस्था को लागू करने में 1 साल के समय की मांग की है।आयोग ने पर्याप्त इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को बनाने जैसी कई वजह गिनायी है। फिलहाल विधि आयोग अपने रिपोर्ट बनाने के अंतिम दौर में है।

कितने मशीनों की होगी जरूरत

2024 और 2019 में एक साथ चुनाव कराए जाने की स्थिति में मशीनों की संख्या को लेकर चुनाव आयोग पहले ही विधि आयोग को जानकारी दे चुका है। एक वोटिंग मशीन में तीन हिस्से होते हैं, जिसमें कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट शामिल है। 2024 के लिए 11.49 लाख अतिरिक्त कंट्रोल यूनिट, 15.97 लाख बैलेट यूनिट्स और 12.37 लाख वीवीपैट की जरूरत होगी और इसमें 5200 करोड रुपए का खर्चा आएगा।

2029 में चुनाव आयोग को 53.76 लाख बैलेट यूनिट्स, 38.67 लाख कंट्रोल यूनिट्स और 41.65 लाख वीवीपैट की जरूरत होगी। इसकी बड़ी वजह पोलिंग स्टेशन और मतदाताओं की बढ़ती संख्या है।

चुनाव आयोग की चिंता

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और चिप की कमी को लेकर काफी चिंतित है। कहा जा रहा है की विधि आयोग के साथ हुई बैठक में भी चुनाव आयोग यह मुद्दा उठा चुका है।दरअसल ईवीएम और भीभीपैट यानी वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन में इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है।

अब खास बात यह है कि 2024 में होने वाले सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए ही चुनाव आयोग को करीब चार लाख मशीनों की जरूरत है। मशीनों की इस मौजूदा जरूरत में विधानसभा चुनाव को शामिल ही नहीं किया गया है।

कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी की अगुवाई में विधि आयोग काम कर रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आयोग संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ करने के विचार का समर्थन कर सकता है।

निजी क्षेत्र का सहयोग नहीं चाहता है चुनाव आयोग

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग को लगता है कि मौजूदा उत्पादक (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड )की मौजूदा प्रतिबद्धताओं को देखते हुए वोटिंग मशीनों के निर्माण को बढ़ाने के लिए 1 साल के समय की जरूरत होगी। साथ ही कोविड-19 महामारी के आने और रूस- यूक्रेन युद्ध के चलते हुए सेमीकंडक्टर की कमी ने ईवीएम हासिल करने की प्रक्रिया को पहले से ही प्रभावित किया है।

इससे पहले भी चुनाव आयोग संसद की स्थायी समिति के सामने सेमीकंडक्टर की कमी का जिक्र कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग मशीनों की उत्पादन को बढ़ाने में निजी उत्पादकों के साथ जाने के खिलाफ है। कहा जा रहा है की आयोग को इस बात का डर है कि जनता के विश्वास और चुनाव की प्रक्रिया की विश्वसनीयता इससे खासी प्रभावित होगी।

 

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