75 % लोग (ओबीसी) सिर्फ 3% में सिमटे : रोहिणी कमीशन

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बीरेंद्र कुमार झा

बिहार में हुए जातीय सर्वे के बाद देश में ओबीसी केंद्रित राजनीति तेज हो गई है। इस बीच चर्चा है कि केंद्र सरकार एसपी, जेडीयू और आरजेडी जैसे दलों की काट के लिए रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट जारी कर सकती है। इसी साल अगस्त में इस कमीशन ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी। माना जा रहा है कि रोहणी कमीशन की रिपोर्ट के सहारे नरेंद्र मोदी सरकार ओबीसी कोटा में भी सबकैटिगराइजेशन कर सकती है। इसके लिए यह आधार होगा कि ओबीसी आरक्षण का लाभ कुछ ही बिरादरियों को मिल पाया है और अब सभी को उचित प्रतिनिधि देने के लिए सबकैटिगराइजेशन होना बहुत जरूरी है।

केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में नामांकन को बनाया आधार

रोहिणी कमीशन ने अपने एक परामर्श पत्र में बताया था कि केंद्र सरकार की ओबीसी कोटे के तहत 97 फ़ीसदी नौकरियां और उसके शिक्षण संस्थानों में दाखिले 25 फीसदी जातियों को ही मिले है।इस तरह 75 प्रतिशत अन्य ओबीसी समुदायों के पास 3% ही हिस्सेदारी है। यही नहीं यही नहीं इसमें भी करीब 25% नौकरियां और शिक्षण संस्थानों में दाखिले 10 ओबीसी जातियों को ही मिले हैं। यह आकलन रोहणी कमीशन ने केंद्र सरकार के 1.3 लाख नौकरियां में नियुक्ति के अध्ययन के बाद किया था। इसके अलावा ओबीसी कोटे के तहत केंद्र सरकार के संस्थानों में दाखिले की भी स्टडी की गई थी।

983ओबीसी जातियों का नौकरियां और शिक्षण संस्थानों मे कोई प्रतिनिधित नहीं

कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में एक और टिप्पणी की थी जो गौरतलब है। रोहिणी कमीशन का कहना है कि 983 ऐसी ओबीसी जातियां हैं, जिनका नौकरियां और शिक्षण संस्थानों में कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं है। इसके अलावा 994 जातियां ऐसी हैं जिनका प्रतिनिधित्व महज 2.68% है। देश भर में ओबीसी के तहत आने वाली करीब 2600 जातियां हैं। अगस्त 2018 में गृह मंत्रालय ने ऐलान किया था कि 2021 की जनगणना के साथ ही ओबीसी जातियों की भी गिनती की जाएगी।हालांकि कोरोना के चलते जनगणना के काम को रोक दिया गया था और अब इसे इलेक्शन के बाद ही कराया जाएगा।

केंद्र की ओबीसी सूची में 2600 जातियां ,क्या चाहती है मोदी सरकार

मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद ओबीसी के लिए 27% आरक्षण केंद्रीय स्तर पर तय हुआ था। हालांकि बीते कुछ दशकों में यह धारणा बनी है कि केंद्रीय सूची में भले ही 2600 ओबीसी जातियां शामिल है, लेकिन इसका फायदा कुछ ही जातियों को मिला है। ऐसे में ओबीसी कोटे के भी सबकैटिगराइजेशन की मांग तेज हुई है।माना जा रहा है कि बिहार में जाति सर्वे की काट के लिए मोदी सरकार रोहणी कमीशन की रिपोर्ट पेश कर सकती है और उस पर कुछ फैसला भी किया जा सकता है।

 

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