बीरेंद्र कुमार झा
केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि कुड़मी को आदिवासी दर्जा देने का कोई मामला केंद्र सरकार के पास लंबित नहीं है, यहां जो लोग बोल रहे हैं यह उनका विचार होगा। अभी राज्य यह सरकार का मामला है।प्रधानमंत्री रोजगार मेला के बाद श्री मुंडा पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। इधर कुडमी को एसटी का दर्जा देने की मांग को लेकर मंगलवार को आदिवासी कुड़मी समाज, बृहद झारखंड आदिवासी कुंडमी मंच का प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव सुखदेव सिंह से मिला। इस दौरान मुख्य सचिव को कुड़मी के इतिहास से संबंधित 480 पन्नों का दस्तावेज सोपा गया। प्रतिनिधिमंडल की मांगों को सुनकर मुख्य सचिव ने कहा कि आपके मांग पत्र के संबंध में मुख्यमंत्री से विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद सरकार इस दिशा में कदम उठाएगी। वार्ता के क्रम में ट्राई के निदेशक राजेंद्र कुमार भी उपस्थित थे।वार्ता के बाद बाहर निकले बृहद झारखंड आदिवासी कुंडमी मंच के संयोजक मंटू महतो ने कहा कि हम सभी कुड़मी जनजाति संगठित रहे तो असंभव कुछ भी नहीं है।चूंकि यह लड़ाई लंबी चलेगी, इसलिए एकजुटता से ही हम अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं ।
डीजीपी से होगी बात
रेल टेकाआंदोलन के समाप्त होने के बाद आंदोलनकारी की गिरफ्तारी किए जाने व ऐसे लोगों पर एफ आई आर किए जाने के मामले पर मुख्य सचिव ने कहा कि वे इस मामले पर डीजीपी से बात कर जल्द से जल्द इस मामले का हल निकालने का प्रयास करेंगे।
मुख्यमंत्री रहते मुंडा ने की थी अनुशंसा: शीतल
केंद्रीय मंत्री के बयान पर टोटैमिक कुर्मी/ कुड़मी विकास मोर्चा के अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि आज केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा कह रहे हैं कि कुड़मी को लेकर जो करना है ,वह राज्य सरकार को करना है। ऐसे में उन्हें बताना चाहिए कि हाल ही में राज्य की जिन तीन जातियों तमाडिया,पुराण व भोक्ता को एस टी की सूची में केंद्र ने शामिल किया था, क्या इसके लिए राज्य सरकार ने कोई अनुशंसा की थी। यह केंद्र ने अपने स्तर से इन्हें एसटी में शामिल कर लिया। श्री ओहदार ने कहा कि यह वही अर्जुन मुंडा है,जिसने मुख्यमंत्री रहते हुए कड़मी बनाने की अनुशंसा की थी, तो फिर आज वे अपनी ही मांग से कैसे मुकर सकते हैं!

