चांद पर विक्रम का वह हेलीकॉप्टर एक्शन यूं ही नहीं था, बड़ी तैयारी में जुटा है इसरो

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बीरेंद्र कुमार झा

चांद पर सोया लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भले ही अभी ना उठे हों, लेकिन भारत का चंद्रयान- 3 मिशन पूर्ण रूप से सफल रहा है।अब इसरो की नजर एक कदम आगे जाने की है। जी हां! भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान अब उसी दिशा में कम कर रहा है, जब चांद पर उतरने वाला अपना चंद्रयान वहां से सैंपल लेकर धरती पर लौट सके।अच्छी खबर यह है कि अपने विक्रम लैंडर ने गहरी नींद में जाने से पहले ही वह हेलीकॉप्टर टेस्ट पूरा कर लिया था। चांद पर उतरने के बाद लैंडर एक बार फिर उड़ा था। साइंटिस्ट उसे अपनी भाषा में होप (HOP)टेस्ट कहते हैं।यह घटना 3 सितंबर को चांद पर घटी थी। पूरी दुनिया ने उसका वीडियो भी देखा था। इसे लेकर भारतीय साइंटिस्ट काफी उत्साहित है कि आने वाले समय में चांद से सैंपल लाया जा सकता है। इस होप एक्सपेरिमेंट से मिलने वाले नतीजे ही भविष्य के लूनर मिशन का आधार बनेंगे। इसरो के एक अधिकारी ने बताया कि इसरो चांद पर प्रयोग के हिसाब से ही भविष्य के मिशन तैयार करेगा जिससे चांद से सैंपल धरती पर आसानी से लाया जा सके।

सिस्टम विकसित करने में जुटा भारत

इसरो के एकअधिकारी ने कहा कि अभी कोई निश्चित डेट लाइन नहीं है, लेकिन हम इस दिशा में सिस्टम विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिससे हमारा चंद्रयान रिटर्न फ्लाइट ले सके। होप एक्सपेरीमेंट्स को उस बड़े प्लान का ट्रेलर समझ लीजिए।फिलहाल दुनिया के कुछ ही देश के पास चांद या किसी अन्य खगोलीय पिंड से वापस आने की क्षमता है। 3 सितंबर को ट्रायल के दौरान लैंडर विक्रम 40 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक उड़ा था और फिर लैंड कर गया था।

पोलर एक्सप्लोरेशन के लिए जापान के साथ काम कर रही है भारती स्पेस एजेंसी

भारतीय स्पेस एजेंसी अगले लूनर मिशन लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन (LUPEX) के लिए साथ काम कर रही है। यह पहल चांद की सतह की जांच करने और वहां पानी समेत दूसरे संसाधनों की खोज के लिए है। लुपेक्स प्रोजेक्ट में जापान की एजेंसी लुनर रोवर पर कम कर रही है जबकि इसरो लैंडर पर एक्सपेरिमेंट कर रहा है जो रोवर को लेकर जाएगा। रोवर पर नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी के ऑब्जरवेशन उपकरण लगे होंगे।

चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में पानी की संभावना

जापान की एजेंसी ने एक मिशन डॉक्यूमेंट में कहा है कि हाल के वर्षों में तमाम डाटा की विश्लेषण से पता चला है कि चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी हो सकता है। अगर वहां पानी मिलता है तो यह चांद पर इंसानी गतिविधियों के लिए भविष्य में ऊर्जा स्रोत के तौर पर काम कर सकता है।

 

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