बीरेंद्र कुमार झा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर आए ।उन्होंने वाराणसी को इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की सौगात देते हुए इसका शिलान्यास किया। राजा तालाब के पास स्थित बंजारी गांव में बनने वाले स्टेडियम के शिलान्यास के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले राजनारायण जी को याद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा यहां से कुछ दूर पर भारतीय लोकतंत्र के प्रखर पुरुष राजनारायण जी का गांव मोतीपुर है। इस धरती से आदरणीय राजनारायण जी और उनकी जन्म भूमि को प्रणाम करता हूं । राजनारायण जी देश की राजनीति में ऐसा नाम है,जिनके साथ कई
इमरजेंसी का हीरो भी कहा जाता है।
राजनारायण के बहाने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना
राजनारायण जी ने ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उन्हीं के इलाके रायबरेली में चुनौती दी थी। मामला कोर्ट में पहुंचा और इंदिरा गांधी की जीत को हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लगा दी थी। इसी के बाद देश को इमरजेंसी झेलना पड़ा था ।राजनारायण जी को याद कर एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना कुछ कहे कांग्रेस को इमरजेंसी की याद भी दिला दी है।
एक तरफ जब कांग्रेस के साथ जुड़े विपक्षी दलों की गठबंधन इंडिया की तरफ से लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर संविधान और लोकतंत्र को लेकर हमले किए जा रहे हैं। पीएम मोदी के राजनारायण को अचानक यहां आकर इस प्रकार याद करने को उनके ऊपर हो रहे विपक्षी दलों के हमलों का जवाब माना जा रहा है।
राजनारायण जी को याद कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी को भी संदेश देने की कोशिश की है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बता दिया कि आज समाजवादी पार्टी उस कांग्रेस के साथ खड़ी है, जिसे राजनारायण जैसे समाजवादी नेता ने इमरजेंसी में उखाड़ फेंका था।
क्या था राज नारायण और इंदिरा गांधी का केस
राजनारायण ने रायबरेली में इंदिरा गांधी के खिलाफ 1971 में चुनाव लड़ा था। वह इंदिरा गांधी से चुनाव हार गए थे। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इंदिरा गांधी पर कई तरह के आरोप लगाए थे। उन्होंने इंदिरा गांधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने यशपाल कपूर को अपना चुनावी एजेंट बनाया, जबकि वह सरकारी सेवा में थे ।इंदिरा गांधी पर उनका दूसरा आरोप था कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान चुनावी मंच और लाउडस्पीकर लगाने के लिए सरकार के पीडब्ल्यूडी कर्मचारियों का इस्तेमाल किया।
तब इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जगमोहनलाल सिन्हा ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में इंदिरा गांधी की जीत को अवैध कर दिया था और उनके 6 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया और इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी। 1975 से 1977 तक देश में इमरजेंसी रही। इसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार गई। मोरारजी देसाई के नेतृत्व में नई सरकार बनी और राजनारायण उस सरकार में मंत्री बने थे।
राजनारायण थे संघर्ष का दूसरा नाम
राज नारायण संघर्ष का दूसरा नाम थे। लोगों उन्हें हैवीवेट पहलवान भी कहते थे।राज नारायण का वजन करीब 110 किलो हुआ करता था और वह अपने सिर पर हरे रंग का स्कार्फ बांधते थे। सितंबर 1958 में उन्होंने अपने समाजवादी साथियों के साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा में ऐसा हंगामा मचाया था कि उनको सदन से निकलवाने के लिए पहली बार हेलमेट लगाए पुलिसकर्मियों को सदन के अंदर पुराना पड़ा था और उन्हें घसीट कर बाहर ले जाना पड़ा था।
एक शिवशक्ति का स्थान चंद्रमा पर और दूसरा काशी में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत हर बार की तरह हर हर महादेव के नारे के साथ की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में भोजपुरी में अपनी बातें रखते हुए कहा कि एक बार फिर वाराणसी में आवे क मौका मिलल,यहांजो आनंद मिलता है उसका वर्णन मुश्किल है। पीएम मोदी ने कहा कि आज में एक ऐसे दिन काशी आया हूं, जब चंद्रमा के शिव शक्ति बिंदु तक चंद्रयान पहुंचाने का भारत का एक महीना पूरा हो रहा है। शिव शक्ति यानी वह स्थान जहां बीते महीने की 23 तारीख को हमारा चंद्रयान लैंड हुआ था। एक शिव शक्ति का स्थान चंद्रमा पर है और दूसरा स्थान मेरा काशी में है।शिव शक्ति के स्थान से शिव शक्ति के उत्थान की आज फिर से बधाई देता हूं।
काशी के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे परिवारजनों कहकर पुकारा। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर हम सभी इकट्ठा हुए हैं, वह एक पावन स्थल जैसा है। यह स्थान माता विंध्यवासिनी के धाम और काशी को जोड़ने वाले रास्ते का एक पड़ाव है। यहां से कुछ दूर पर भारतीय लोकतंत्र के प्रखर पुरुष राजनारायण जी का गांव मोती कोट है।इस धरती से आदरणीय राजनारायण जी और उनकी जन्म भूमि को प्रणाम करता हूं।उन्होंने कहा कि काशी में आज इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के आधारशिला रखी गई है ।यह स्टेडियम में केवल वाराणसी है ,बल्कि पूर्वांचल के युवाओं के लिए एक वरदान है यहां एक साथ 30 हजार से ज्यादा लोग बैठकर मैच देख पाएंगे। यहां की युवाओं को यहां प्रेक्टिस करने का भी मौका मिलेगा और मेरी काशी को इसका लाभ होगा।

