लोकसभा में बगैर स्पीकर कैसे होगी कार्यवाही, नाराज है ओम बिड़ला,क्या कहता है नियम

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बीरेंद्र कुमार झा

मॉनसून सत्र के दौरान सांसदों के व्यवहार पर नाराज हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में आने से ही इनकार कर दिया है ।बुधवार को भी वे संसद की कार्यवाही से दूर रहे। दरअसल मॉनसून सत्र की शुरुआत के साथ ही संसद में मणिपुर मुद्दे को लेकर हंगामा जारी है। एक ओर जहां विपक्ष इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बयान की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष ही चर्चा नहीं होने दे रहा है।

क्यों नाराज हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला

लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों से अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें इसके बारे में बता दिया है। सूत्रों के अनुसार बिड़ला ने कहा है कि सदन की गरिमा उनके लिए सर्वोच्च है और सदन में मर्यादा कायम करना सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकसभा अध्यक्ष का कहना है कि सदस्यों का व्यवहार परंपराओं के विपरीत हैं।

क्या होगा लोकसभा अध्यक्ष की गैरमौजूदगी में

ओम बिड़ला का कहना है कि वह सांसदों का रवैया सुधरने तक लोकसभा में नहीं आएंगे। तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर स्पीकर की गैरमौजूदगी में सदन की कार्यवाही कैसे होगी। सदन के आसान पर कौन बैठेगा।और किसकी अध्यक्षता में सदन संचालित होगा।संविधान निर्माताओं ने हालांकि सांसदों के इस प्रकार से अमर्यादित होने और लंबे समय तक हंगामा बरपाकर सदन को बाधित करने के बारे में नहीं सोचा होगा जिससे नाराज होकर लोकसभा अध्यक्ष सदन में रहते हुए भी आसन संभालने से तबतक के किए इनकार कर दे जबतक कि सांसद अपने व्यवहार में सुधा न ला लें। लेकिन उन्होंने संविधान में लोकसभा अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन का संचालन कैसे सुचारू रूप से हो इसकी व्यवस्था कर दी है।इसके अनुसार लोकसभा में स्पीकर की गैरमौजूदगी में डिप्टी स्पीकर उनका काम संभालेंगे ।और जब स्पीकर और डिप्टी स्पीकर स्पीकर दोनों ही अनुपस्थित होंगे तो चेयर पर्सन पैनल का एक सदस्य सदन की अध्यक्षता करेगा ।

बुधवार को क्या हुआ

बुधवार को स्पीकर ओम बिड़ला सदन नहीं पहुंचे और डिप्टी स्पीकर भी मौजूद नहीं थे। ऐसे में इन दोनो की गैरमौजूदगी में वाईएसआरसीपी के मिथुन रेड्डी और बीजेपी के किरीट सोलंकी ने अध्यक्ष जिम्मेवारी संभाली।मंगलवार को दिल्ली सेवा बिल पेश होने के बाद लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ था,तब ओम बिड़ला ने कहा था कि पूरा देश देख रहा है कि आप संसद में इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं जो उचित नहीं है। बिड़ला ने कहा था कि मैं आपको चर्चा के दौरान पर्याप्त मौका दूंगा।

ऐसा नहीं हुआ है पहली बार

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सदन में आकर आसन ग्रहण न करने किब्याह कोई पहली घटना नहीं है। मार्च 2020 में भी बजट सत्र के दौरान ऐसी ही घटना घटी थी। तब ओम बिड़ला सदन से लगातार दो दिनों तक दूर रहे थे। गौरतलब है कि तब सदन में लगातार दिल्ली हिंसा और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की टिप्पणी को लेकर हंगामा चल रहा था।

 

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