बिहार में जातिगत गणना का 20% काम शेष,अदालत की रोक हटने के बाद अब तेजी से होगा काम

0
378

बीरेंद्र कुमार झा

बिहार में जाति आधारित गणना का काम करीब 80% पूरा हो चुका है। इसके ऑफलाइन काम पूरे हो चुके हैं। डाटा इंट्री का कार्य ऑनलाइन किया जाना शेष है।जाति गणना का करीब 20% काम ही बचा हुआ है। पटना हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद जाति आधारित गणना की पुनः शुरू होने से 10 दिनों में इसे पूरा कर लिए जाने की संभावना है

पिछले कुछ वर्षों से ही रहा था प्रयास

बिहार में जाति गणना की मांग पिछले कई साल से हो रही थी। राज्य सरकार 18 फरवरी 2019 को बिहार विधानसभा से और 27 फरवरी 2020 विधान परिषद में इस प्रस्ताव को पारित करा चुकी थी।वर्ष 2021 के अगस्त में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव समेत सभी पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी और मांग की थी कि पूरे देश में जातिगत जनगणना कराया जाय।

केंद्र सरकार जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं

हालांकि केंद्र सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराने से इनकार कर दिया।इसके बाद बिहार सरकार द्वारा यहां जातीय गणना करने की कवायद शुरू की गई। इसे लेकर 2 जून 2022 को राज्य मंत्री परिषद में इसे मंजूरी मिली थी।इसके साथ ही राज्य में जाति गणना को लेकर प्रशिक्षण एवं गनना से जुड़े तमाम कार्य शुरू हो गए थे।

7 फरवरी 2923 से शुरू हुआ जातिगत गणना

जातीय गणना के पहले चरण का कार्य 7 जनवरी 2023 से शुरू हुआ था।करीब 5.18 लाख से अधिक कर्मी 2 करोड़ 58 लाख 90 हजार 497 परिवारों तक पहुंचे। पहले चरण में 7 से 21 जनवरी तक सभी आवासीय परिसरों की गिनती की गई और वहां रहने वाले परिवार के मुखिया का नाम अंकित किया गया। साथ ही परिवार में रहने वाले सदस्यों की सभी जानकारी भी रजिस्टर में दर्ज की गई।

15 अप्रैल से 15 मई तक दूसरे चरण की होनी थी गणना

राज्य में दूसरे चरण की जाति आधारित गणना की प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हुई। इसे 15 मई तक संचालित किया जाना था।इस गणना के लिए पूरे राज्य में 5 लाख 19 हजार कर्मचारी लगाए गए। प्रारंभ में 15 दिनों तक मकानों की संख्या अंकित करने का काम किया गया।संख्या अंकित करने के बाद गणना कार्य में लगाए गए कर्मियों ने वार्ड स्तर पर परिवारों की गिनती की।

इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चला गया। 4 मई को पटना उच्च न्यायालय ने जाति गणना पर रोक लगा दी थी। तब तक करीब 80% गणना संबंधी कार्य पूरे कर लिए गए थे। इस जाति गणना पर अब तक करीब ₹500 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here