संसद में दिखेगा एक और बड़ा खेल ,दिल्ली अध्यादेश पर जदयू ने जारी किया व्हिप , उपसभापति हरिवंश क्या करेंगे ?

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न्यूज़ डेस्क 
मौजूदा संसद सत्र में केवल मणिपुर के मुद्दे पर ही बहस नहीं होनी है। केंद्र सरकार ने दिल्ली को लेकर जो अध्यादेश जारी किया हुआ है अब उस पर संसद में बिल लाने को तैयार है। इधर दिल्ली के मुख्यमंत्री किसी भी सूरत में राज्य सभा में बिल के विरोध में विपक्षी दलों के साथ खड़े हैं। केजरीवाल की कोशिश है कि चाहे जैसे भी हो राज्य सभा में बिल पास न हो। हालांकि राज्य सभा में भी बीजेपी और एनडीए के पास विपक्ष से ज्यादा सांसद हैं। बीजेपी की कोशिश भी यही है कि किसी भी सूरत में बिल पास हो जाए। अब यह प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।        
    इसे लेकर अब सदन में होने वाली वोटिंग से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही तरफ से व्हिप जारी करने का दांव भी चला जा रहा है। सत्ताधारी एनडीए का नेतृत्व कर रही बीजेपी ने व्हिप जारी कर अपने सभी लोकसभा सदस्यों से 13 अगस्त तक सदन में उपस्थित रहने को कहा है। दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन जिसका नाम इंडिया रखा गया है उसके अहम सदस्य जनता दल यूनाइटेड ने भी अपने सभी राज्यसभा सांसदों को व्हिप जारी किया है। जेडीयू ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह समेत राज्य सभा के अपने सभी सदस्यों से दिल्ली अध्यादेश पर वोटिंग के दौरान सदन में मौजूद रहने और पार्टी द्वारा निर्धारित स्टैंड का पालन करने के आदेश दिए हैं। जेडीयू की ओर से व्हिप जारी किए जाने के बाद से हरिवंश को लेकर नई बहस शुरू हो गई है कि क्या सभापति और उपसभापति भी पार्टी द्वारा जारी व्हिप के दायरे में आते हैं? 
            इस बारे में जांच पड़ताल करने के बाद पता चला की व्हिप के दायरे से केवल सभापति ही बाहर रहता है। आसन पर कोई भी व्हिप लागू नहीं होता क्योंकि जब कोई सांसद आसन पर होता है, तब वो किसी भी पार्टी का नहीं होता, वह सदन का होता है। वह पक्ष-विपक्ष से उपर होता है। संसद की कार्यवाही से जुड़े नियम उपसभापति को व्हिप के दायरे से बाहर नहीं करते। ऐसे में अगर हरिवंश नारायण सिंह अगर वोटिंग के दौरान आसन पर नहीं होंगे, तो वे जेडीयू द्वारा जारी व्हिप को मानने के लिए बाध्य होंगे।            राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश अभी जदयू  से सांसद हैं। ऐसे में जेडीयू की ओर से जारी व्हिप राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश पर भी लागू होगा। अब सवाल उठता है कि हरिवंश किस परिस्थितियों में इससे कैसे बच सकते हैं। तो इसका जवाब है- एक ही स्थिति में हरिवंश जेडीयू के व्हिप के दायरे से बाहर रह सकते हैं, वह है मतदान के समय उनका आसन पर होना जिसकी संभावना ना के बराबर है।
            बता दें की हरिवंश मतदान के समय आसन पर रहेंगे तब भी वे व्हिप का पालन कर रहे होंगे। क्योंकि व्हिप ये सुनिश्चित करने के लिए होता है कि पार्टी के सभी सदस्य निर्धारित तिथि, समय पर सदन में मौजूद रहें। हरिवंश आसन पर हुए तब भी सदन में मौजूद होंगे और इस तरह से व्हिप का पालन भी हो रहा होगा। लेकिन उस आसन पर बैठ के वो मत देने की प्रक्रिया से उपर हो जाएंगे।
                हरिवंश के दिल्ली अध्यादेश को लेकर वोटिंग के दौरान आसन पर न होने की संभावना के पीछे भी कई कारण है। बीजेपी दिल्ली अध्यादेश वाले मामले को नाक की लड़ाई बना चुकी है ऐसे में इस मुद्दे को लेकर बीजेपी बिल पर वोटिंग के समय उसी दल के सांसद को आसन पर बैठाने का रिस्क नहीं लेगी, जो इसके विरोध में है। क्योंकि जो शख्स आसन पर बैठा होता है उसके द्वारा किया गया हर फैसला सर्वमान्य होता है। हरिवंश जब राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे तब जेडीयू बीजेपी के साथ गठबंधन में थी। अब वह विपक्षी में है।

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