अखिलेश अखिल
यह सच है कि मौजूदा राजनीति 360 डिग्री पर घूम रही है। बीजेपी जिसकी कल्पना भी नहीं की थी वह सब हो रहा था। बीजेपी ने सोंचा था कि कांग्रेस तो जमींदोज हो चुकी है और कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी पप्पू बन चुके हैं। लेकिन सब पलट जो गया। न कांग्रेस जमींदोज हुई और न ही राहुल पप्पू साबित हुए। सच तो यही है कि कांग्रेस ने खुद को मजबूत भी किया और राहुल गाँधी कितने मजबूत बनकर उभरे हैं इसकी बानगी यही है कि पीएम मोदी से लेकर बीजेपी बढ़ी हुई है।
मणिपुर का मुद्दा अब बीजेपी के लिए फांस है और सरकार के लये मुसीबत भी। यह बात और है कि बीजेपी और सरकार के लोग आज भी यह भ्रम फैलाने में सफल हैं कि वे संसद तो करना चाहते हैं विपक्ष ही ारंगा डाल रहा है। लेकिन सच यह नहीं है। सच तो यही है कि विपक्ष मणिपुर के मसले पर प्रधानमंत्री मोदी का बयां संसद में दिलाना चाहती है। और पीएम मोदी चुकी देश के मुखिया हैं इसलिए यह उनका अधिकार और कर्तव्य भी बनता है कि वे सदन में इस पर बोले। मणिपुर का मसला कोई साधारण मसला नहीं है। यह देश की एकता और अखण्डा से भी जुड़ा हुआ है।
विपक्ष पिछले चार दिनों से कह रहा है कि प्रधानमंत्री चरच करें। हारकर विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव भी लाया। मकसद एक ही है कि पीएम मोदी इस बहाने भी संसद में आएं और बोले। .विपक्ष को पता है कि इस अविश्वास प्रस्ताव से कोई सरकार नहीं गिरने जा रही है। विपक्ष को यह भी कि सरकार पूर्ण बहुमत में है और आगे भी रह सकती है लेकिन उसका मतलब तो सिर्फ चर्चा करने भर से है। लेकिन सरकार इस पर भी खेल कर रही है। वह कह रही है कि जनता और देश का विश्वास मोदी पर है और विपक्ष को सब पता चल जायेगा। गजब की राजनीति है। दरअसल बीजेपी को यही लगता है कि पुरे देश की जनता सिर्फ उसकी ही बात सुनती है। क्या उसे पता नहीं नहीं कि देश की सिर्फ 38 फीसदी जनता ही उसे वोट देती है और बाकी वोट विपक्ष के पास जाता है। ऐसे में जनता किसकी सुन रही है इसका ?
मणिपुर के मुद्दे को लेकर जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस ने बुधवार को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। स्पीकर ने इसपर चर्चा के लिए मंजूरी भी दे दी है। कांग्रेस ने मांग है कि इस प्रस्ताव पर गुरुवार को ही चर्चा की जानी चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सरकार ने कहा है कि जनता को पीएम मोदी और बीजेपीपर पूरा विश्वास है। इसका क्या मतलब है ?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सभी दलों के नेताओं से बातचीत करने के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा की तारीख तय करेंगे। कांग्रेस ने कहा है कि ये प्रस्ताव विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) की ओर से सामूहिक तौर पर लाया गया है। मणिपुर के मुद्दे पर पीएम मोदी से संसद के भीतर जवाब मांग रहे विपक्षी गठबंधन इंडिया की ओर से कांग्रेस ने इस रणनीति के साथ यह कदम उठाया है कि प्रधानमंत्री मोदी को सदन में बोलने के लिए बाध्य किया जा सके।
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी पर पूरा विश्वास है। विपक्ष ने पीएम मोदी के पिछले कार्यकाल में भी यही किया था और जनता ने उसे सबक सिखाया था। इस बार फिर देश की जनता इन लोगों को सबक सिखाएगी. संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ये अविश्वास प्रस्ताव आने दीजिए, सरकार तैयार है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि नियम के अनुसार जब अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए मंजूर कर लिया जाता है तो उसके 10 दिनों के भीतर सदन में चर्चा होती है, लेकिन लोकसभा की परंपरा रही है कि जब भी यह प्रस्ताव आता है तो बाकी सारे कार्यों को रोककर इस पर चर्चा होती है। हमारा आग्रह है कि लोकसभा अध्यक्ष को प्राथमिकता के आधार पर इसे लेना चाहिए और इस पर कल ही चर्चा आरंभ होनी चाहिए और जल्द से जल्द मतदान होना चाहिए।
मनीष तिवारी ने आगे कहा कि पिछले 83-84 दिनों से मणिपुर में जो स्थिति बनी हुई है उस पर कानून-व्यवस्था चरमरा गई है, समुदाय के बीच विभाजन हो गया है। वहां सरकार नाम की चीज नहीं रह गई है। इन तथ्यों ने हमें अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए मजबूर किया है। सवाल संख्या का नहीं बल्कि नैतिकता का है। बुनियादी सवाल यह है कि जवाबदारी किसकी है। सवाल राष्ट्र की सुरक्षा का है।

