अखिलेश अखिल
आगामी लोकसभा चुनाव और पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव के मद्दे नजर बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। सबसे पहले पांच राज्यों में पार्टी अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है जिसको लेकर पार्टी के भीतर कई नामो की चर्चा चल रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष जल्द पांच ४राज्यों के अध्यक्ष के नामो की जल्द घोषणा कर सकते हैं। जिन राज्यों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है उनमे मध्यप्रदेश ,तेलंगाना पंजाब ,झारखंड और केरल है।
बदलाव की खबरों के बीच पंजाब के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने आज सोमवार को इस्तीफा दे दिया। हालांकि, अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनील जाखड़ को पंजाब भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है। जाखड़ कांग्रेस से भाजपा में आए हैं।
इस साल मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव हैं। मध्य प्रदेश और मिजोरम में भाजपा की सरकार है। वहीं राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और तेलंगाना में बीआरएस सत्ता में है।
28 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा सहित कई दिग्गज नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में नड्डा की मौजूदगी से राज्य स्तर से लेकर सरकार और भाजपा संगठन में बदलाव पर चर्चा की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे ज्यादा चर्चा धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव के नाम पर है। इन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
इसी महीने के 6,7 और 8 जुलाई को बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और सभी मोर्चों के अध्यक्ष क्षेत्रीय नेताओं के साथ बैठक करेंगे। यह पहला मौका है जब बीजेपी तीन क्षेत्रों (पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी) के मोर्चा और महासचिवों के अध्यक्षों के साथ बैठकें करेगी।
3 जुलाई को दिल्ली के प्रगति मैदान में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक होनी है, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी करेंगे। इस बैठक की तारीख सामने आने से एक दिन पहले पीएम मोदी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की थी। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि मीटिंग में मंत्रिपरिषद में बदलाव हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र में एनसीपी के कुछ विधायकों के एनडीए में आने के बाद उनके कोटे से प्रफुल्ल पटेल को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा महाराष्ट्र में शिंदे गुट की शिवसेना को भी केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
इसके अलावा बिहार से रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को भी कैबिनेट में लाने की चर्चा है। बिहार से ही नीतीश का विरोध कर जदयू छोड़ने वाले आरसीपी सिंह को भी मंत्री बनाने की बात चल रही है। बीजेपी का पूरा फोकस अभी आगामी लोकसभा चुनाव पर है। बीजेपी चाह रही है कि बिहार में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करे। अगर बिहार में पार्टी की चूक होती है तो इसका असर सरकार बनाने पर हो सकता है। यही वजह है कि बिहार में बीजेपी किसी भी तरह से जोड़ तोड़ के जरिये भी जितनी सीटें पिछले बार एनडीए के खाते में गई थी उतनी सीटों पर जीत चाहती है। हालांकि बीजेपी जानती है कि पिछले आंकड़े को पाना कठिन है लेकिन उसी यह भी उम्मीद है कि अगर जदयू में सेंध लग जाए तो खेल हो सकता है। बीजेपी जदयू को भी तोड़ने की कोशिश कर रही है। बिहार में अभी दुश्मन बीजेपी के लिए नीतीश कुमार हो गए हैं।

