बीरेंद्र कुमार झा
भारत का पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर इस समय हिंसा की आग में जल रहा है।50 दिनों से भी ज्यादा समय से वहां हिंसा जारी है।इस हिंसा में वहां अबतक लगभग एक सौ से ज्यादा लोगों की हिंसा में जान चली गई है,लेकिन फिर भी वहां हिंसा अब तक थमने का नाम नहीं ले रही है। इसे रोकने के लिए सुरक्षा बल जगह-जगह तलाशी ले रहे हैं।इसी क्रम में सुरक्षाबलों ने मणिपुर के ईंथम गांव में केवाईकेल के करीब एक तलाशी अभियान चलाया था।सेना की तलाशी अभियान में 12 खूंखार आतंकियों को सेना के जवानों ने हिराशत में के लिया था।इस बीच आतंकियों की गिरफ्तारी की खबर सुनकर वहां गांव के महिला पुरुष वहां जमा होने लगे।देखते ही देखते वहां लगभग 1500 के आसपास लोग वहां जमा हो गए। इसी दौरान उनकी गिरफ्तारी के विरोध में महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया जिस कारण सुरक्षा बलों को मजबूरन हिरासत में लिए आतंकियों को छोड़ना पड़ा।
खुफिया जानकारी के आधार पर हुई कार्रवाई
सुरक्षाबलों ने 24 जून को इंफाल पूर्वी जिले के इथम गांव में विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर एक ऑपरेशन शुरू किया था। ऑपरेशन के दौरान जवानों ने हथियारों और गोला बारूद के साथ 12 केवाईकेएल कैडर को हिरासत में ले लिया इसी दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगखोम तांबा और उत्तम को भी गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया गया।वह 2015 में डोगरा मामले की छठी बटालियन पर घात लगाकर किए गए हमले का मास्टरमाइंड था।
6ठी बटालियन पर हमले का मास्टरमाइंड भी छूटा
सुरक्षाबलो ने गुप्त सूचना के आधार पर तलाशी अभियान चलाकर जिन खूंखार आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था, उन आतंकियों में छठी बटालियन पर घात लगाकर हमला करने का मास्टरमाइंड कर्नल मोइरांग्थेम तांबा उर्फ उत्तम भी शामिल था। गौरतलब है कि उत्तम छठी बटालियन पर घात लगाकर किए गए हमले का मास्टरमाइंड था। महिलाओं की भीड़ ने उसे भी छुड़ा लिया।सुरक्षा बल के जवानों ने बताया कि करीब 1500 महिलाओं की भीड़ ने सुरक्षाबलों को घेर लिया और सभी आतंकियों को छुड़ाकर अपने साथ ले गईं।

