पटना (वीरेंद्र कुमार): बिहार के कई स्वास्थ्य केंद्रों में मेडिकल कचरा निस्तारण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों को बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्धारित मानदंडों का पालन करते हुए जैव चिकित्सा अपशिष्ट निपटान विधि से मेडिकल कचरा निपटान नहीं करने की वजह से एक नोटिस जारी कर उन्हें बंद कर देने का अल्टीमेटम दिया है।
इन 6 जिलों को मिला 15 दिन की मोहलत
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अशोक कुमार घोष ने कहा कि राज्य के 6 जिलों पटना,भोजपुर, बक्सर,नालंदा,रोहतास और कैमूर में स्वास्थ्य केंद्रों को मेडिकल कचरा के निपटान के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 15 दिनों की मोहलत के साथ बंद करने का प्रस्तावित निर्देश भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ये स्वास्थ्य केंद्र राज्य में सामान्य जैव चिकित्सा अपशिष्ट उपचार सुविधाओं में चिकित्सा अपशिष्ट के वैज्ञानिक भंडारण परिवहन और उपचार से संबंधित मानदंडों का पालन करने में आगे भी विफल रहते हैं तो बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन्हें बंद कर देने का आदेश देने के लिए बाध्य हो जाएगा।
पटना में होती से सबसे ज्यादा नियमों की अवहेलना
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि सबसे अधिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में नियमों को पटना में ताक पर रखा जा रहा है। इसके अलावा भोजपुर बक्सर नालंदा रोहतास और कैमूर जिले में भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा की बोर्ड को ऐसे कदम इसलिए उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि बार-बार याद दिलाने के बावजूद इन चिकित्सा केंद्रों ने अपने रवैए में कोई बदलाव नहीं किया। बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि संबंधित जिला अधिकारियों को भी उनके जिलों में दूसरी चिकित्सा केंद्रों को नोटिस भेजे जाने की सूचना दे दी है।
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डॉक्टर नवीन कुमार ने कहा कि कचरा निपटान नियमों का पालन नहीं करने से मानव और पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में सभी चिकित्सा प्रतिष्ठानों को जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का पालन करना अनिवार्य है। नियमों का पालन नहीं करना एक गंभीर अपराध है।

