न्यूज़ डेस्क
महिला पहलवानों को न्याय मिलेगा इसकी सम्भावना संदिग्ध दिख रही है। हालांकि सरकार ने पिछले दिनों पहलवानों से यही कहा था कि वे 15 जून तक इंतजार करें। कहा जा रहा है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में 15 जून को चार्जशीट दायर कर सकती है। लेकिन इससे पहले आज दिल्ली पुलिस ने पीड़ित महिला पहलवानों को सबूत जमा करने की मांग की है। भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर अपनी सांस की जांच के बहाने अपने छाती छूने और पेट पर हाथ फिराने का आरोप लगाने वाली दो महिला पहलवानों से दिल्ली पुलिस ने सबूत के तौर पर फोटो, ऑडियो और वीडियो उपलब्ध कराने को कहा है। जिससे उनके आरोपों को सबूत के रूप में पेश किया जा सके। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पांच जून को महिला पहलवानों को सीआरपीसी की धारा 91 के तहत अलग से नोटिस जारी किया गया और उन्हें जवाब देने के लिए एक दिन का समय दिया गया। एक पहलवान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ‘हमारे पास जो भी सबूत हैं, हमने मुहैया कराए हैं। हमारे एक रिश्तेदार ने भी पुलिस को वह दिया है, जो उन्होंने मांगा था।’ शिकायतकर्ताओं में से एक की शिकायत के मुताबिक एफआईआर में कहा गया है कि विदेश में एक बड़ा पदक जीतने के बाद सिंह ने उसे 10 से 15 सेकंड के लिए कसकर गले लगाया।
पहलवान ने दावा किया कि टटोले जाने से बचने के लिए उसे अपना हाथ अपने स्तन के पास रखना पड़ा। कहा जाता है कि पुलिस ने इस पहलवान से उस घटना की तस्वीर मांगी थी जब गले मिले थे। 7 जून को खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ बातचीत में पहलवानों ने 15 जून तक अपना विरोध प्रदर्शन रोकने पर सहमति जताई थी। 15 जून को इस मामले में दिल्ली पुलिस चार्जशीट दायर करेगी। पुलिस ने शिकायतकर्ताओं से कथित घटनाओं की तारीख और समय, डब्ल्यूएफआई कार्यालय में बिताए गए समय और उनके रूम मेट्स और अन्य संभावित गवाहों के नाम पेश करने के लिए कहा है। पुलिस ने उस होटल का ब्योरा भी मांगा है जहां एक पहलवान डब्ल्यूएफआई ऑफिस में जाने के दौरान ठहरी थी।
उधर आज गोंडा में एक रैली को संबोधित करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव एक बार फिर अपने कैसरगंज निर्वाचन क्षेत्र से लड़ेंगे। भारत की शीर्ष महिला पहलवानों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे बृजभूषण शरण सिंह नरेंद्र मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने के अवसर पर एक रैली को संबोधित कर रहे थे।
बता दें कि रैली का आयोजन 2024 के चुनाव के लिए भाजपा के महासंपर्क अभियान के तहत किया गया था। रैली सिंह का शक्ति प्रदर्शन थी, जिसे पहले 5 जून को अयोध्या में की जानी थी। हालांकि सिंह ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया लेकिन उन्होंने अपनी बात को समझाने के लिए उर्दू में एक दोहे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, कभी अश्क, कभी गम, तो कभी जहर पिया जाता है.. तब जा कर जमाने में जिया जाता है। ये मिला मुझे मोहब्बत का सिला, बेवफा कह कर मुझे याद किया जाता है।
उन्होंने मोदी सरकार के काम की सराहना की और पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियों के बारे में बताया। इससे पहले, बृजभूषण ने अपने घर से रैली स्थल तक सैकड़ों कारों के काफिले के साथ रोड शो किया। रैली में सिंह के प्रभाव क्षेत्र के सभी छह लोकसभा क्षेत्रों के लोगों की उपस्थिति थी।

