न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को बड़ा शूटआउट हुआ है। लखनऊ के एसआईटी कोर्ट में सुनवाई के लिए आये यूपी के पूर्व ऊर्जा मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता रहे ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड के आरोपी संजीव जीवा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाश वकील के वेश में आये थे।आरोपी को लोगो ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
गौरतलब है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी वही नेता थे, जिन्होंने यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती को गेस्टहाउस कांड में बचाया था। कहा जाता है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी का यूपी में इतना प्रभाव था कि अगर उनकी हत्या नहीं हुई होती तो यूपी के मुख्यमंत्री वही बनते। ब्रह्मदत्त द्विवेदी यूपी के फर्रुखाबाद जिले से राजनीति के शिखर पर पहुंचे थे और वर्तमान में फर्रुखाबाद से उन्हीं के बेटे मेजर सुनील दत्त द्विवेदी विधायक हैं।

संजीव जीवा को माफिया मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था। संजीव जीवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक कुख्यात अपराधी था, जो कभी कंपाउंडर हुआ करता था। उसने एक बार अपने ही मालिक का किडनैप कर लिया था। संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा फिलहाल लखनऊ की जेल में बंद था। हाल ही में प्रशासन द्वारा उसकी संपत्ति भी कुर्क की गई थी।
हाल ही में संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा के गैंग के एक शख्स को बीते दिनों शामली पुलिस ने एके-47,1300 कारतूस और तीन मैगजीन के साथ पकड़ा था। शामली पुलिस ने रास्ते में चेकिंग के दौरान अनिल नाम के शख्स को धर दबोचा था। दरअसल, जीवा मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। शुरुआती दिनों में वह एक दवाखाना संचालक के यहां कंपाउंडर के नौकरी करता था।

इस हत्या की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। तीन सदस्यों की एसआईटी में एडीजी टेक्निकल मोहित अग्रवाल, आईपीएस नीलाब्जा चौधरी और अयोध्या के आईजी प्रवीण कुमार होंगे। एक सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

