बीरेंद्र कुमार झा
उड़ीसा के बालासोर रेल हादसे की सबसे बड़ी वजह अब तक सिग्नल में गड़बड़ी को माना जा रहा है।रेलवे बोर्ड की सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में, साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया है।हादसे के बाद रेलवे बोर्ड की सिफारिश पर सीबीआई ने कोरोमंडल रेल दुर्घटना मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अब जांच शुरू कर दी है।
रेलवे अधिनियम की धारा 153 154 और 175 के तहत दर्ज हुआ केस
सीबीआई ने रेल मंत्रालय की सिफारिश और उड़ीसा उड़ीसा सरकार की सहमति, व डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) और भारत सरकार के प्राप्त आदेशों पर मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने आईपीसी और रेलवे अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एक एफआईआर दर्ज की है। आईपीसी की धारा 337 338 304a 34 और रेलवे अधिनियम की धारा 153 154 175 के तहत केस दर्ज किया है।हादसे की जांच के सिलसिले में सीबीआई और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से पूछताछ की।
धारा 153 : रेल द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा को जानबूझकर किए गए कार्य या लोप (कमी) द्वारा संकट में डालना
इस धारा के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति किसी रेल पर यात्रा करने वाले या विद्यमान किसी व्यक्ति की सुरक्षा को किसी विधि विरुद्ध कार्य या जानबूझकर किए गए किसी रुपया उपेक्षा से संकट उत्पन्न करेगा या करवाएगा या किसी रेल पर किसी चल स्टॉक में बाधा डालेगा या डलवा आएगा या बाधा डालने का प्रयत्न करेगा तो वह 5 वर्ष तक के कारावास से धन धन्य होगा।
दंड : 5 वर्ष तक का कारावास
धारा 154: रेल द्वारा यात्रा करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा को उतावलेपन् या उपेक्षापूर्ण कार्य द्वारा लोप (भूल/कमी) द्वारा संकट उत्पन्न करना
यदि कोई व्यक्ति उतावलेपन से और उपेक्षापूर्ण रीति से कोई कार्य करेगा या ऐसा कार्य करने का लोप ( भूल /कमी) करेगा, जिसे करने के लिए वह वैध रूप से आवद्ध है और रेल पर यात्रा करने वाले या विद्यमान किसी व्यक्ति की सुरक्षा पर उस कार्य या लोप से संकट उत्पन्न होने की संभावना है तो वह 1 वर्ष तक के कारावास से या जुर्माने से, या दोनों से दंडनीय होगा।
दंड: जुर्माना या 1 वर्ष तक का कारावास या दोनों दंड
धारा 175: नियम या आदेश की अवज्ञा करके अथवा उतावलेपन् या लापरवाही से रेल सेवक द्वारा ड्यूटी पर रहते हुए व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न करना
यदि कोई रेल सेवक ड्यूटी पर है और वह इस अधिनियम के अधीन बनाए गए किसी नियम की अवज्ञा करके या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन किसी अनुदेश, निवेश या आदेश की अवज्ञा करके या किसी उतावलेपन के या उपेक्षापूर्ण कार्य या लोप (कमी) द्वारा किसी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए संकट उत्पन्न करेगा तो वह 2 वर्ष तक के कारावास से या ₹1000 के जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा।
दंड: ₹1000 तक का जुर्माना या 2 वर्ष तक का कारावास या दोनों दंड
सीबीआई रेलवे सुरक्षा आयुक्त और जीआरपी भी कर रही है जांच
सीबीआई अधिकारियों की एक टीम फॉरेंसिक विशेषज्ञों के साथ उड़ीसा के बालासोर जिले में पहुंचकर जांच में जुट गई है। सीबीआई की 10 सदस्य टीम ने पटरियों और सिग्नल रूम का निरीक्षण किया और बहानागा बाजार रेलवे स्टेशन पर तैनात रेल अधिकारियों से पूछताछ की। सीबीआई अधिकारियों के साथ आई फॉरेंसिक टीम ने भी सिग्नल ग्रुप के कर्मचारियों से बात की और विभिन्न उपकरणों के उपयोग एवं उनके काम करने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। सीबीआई हादसे की आपराधिक कोण से जांच करेगी क्योंकि रेलवे ने हादसे के पीछे तोड़फोड़ या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका जताई है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त जीआरपी भी इस मामले की जांच कर रही है है।

