न्यूज़ डेस्क
नहले पर दहले की कहावत कर्नाटक में चरितार्थ होती दिख रही है। मौजूदा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने इसी शैक्षणिक वर्ष से स्कूली पाठ्यपुस्तक से संघ के संस्थापक रहे केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनी को हटाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस की सरकार ने इसके साथ ही उन सभी सामग्रियों को भी न पढ़ाने का फैसला किया है जो बीजेपी शासन के दौरान पाठ्यपुस्तक में जोड़े गए हैं। जानकारी के मुताबिक सरकार जल्द ही इस मामले में एक सर्कुलर जार करने जा रही है।
हेडगेवार के अलावे दक्षिणपंथी चक्रवर्ती सुलिबेले और बन्नान्जे गोविंदाचार्य से जुडी सामग्रियों को भी हटाने की तैयारी चल रही है। चुकी नए शैक्षणिक वर्ष की पुस्तकें प्रकाशित हो गई इसलिए इसे पाठ को अभी नाह हटाया जायेगा लेकिन शिक्षकों को कहा जा रहा है वे इन पाठों को अब बच्चों को न पढ़ाएं।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा और प्रगतिशील विचारकों ने भाग लिया। शिक्षण, परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से विवादास्पद और आपत्तिजनक पाठों को हटाने का भी निर्णय लिया गया है।सिद्दारमैया ने निर्देश दिया कि भाजपा के कार्यकाल में जोड़ी गई विवादित सामग्रियों की जांच के लिए एक समिति गठित की जाए जो एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपे। आधिकारिक सर्कुलर जारी होने से पहले कैबिनेट में इस मामले पर चर्चा होने की संभावना है।इससे पहले, सिद्दारमैया ने स्पष्ट बयान दिया था कि छात्रों के दिमाग में जहर भरने वाली सामग्री को हटा दिया जाएगा।
उधर ,बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ता गणेश कार्णिक ने कहा कि बीजेपी सरकार द्वारा राष्ट्र हित में उठाए गए कदमों को खुले तौर पर वापस लेने, मना करने और रोकने के कदमों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।उन्होंने कहा, बिजली दरों में बढ़ोतरी, कर्नाटक मिल्क फेडरेशन द्वारा किसानों को दी जाने वाली 1.50 रुपये की दूध सब्सिडी को वापस लेना, उत्पाद शुल्क में वृद्धि से पता चलता है कि कांग्रेस सरकार मध्य और उच्च मध्यम वर्ग की जेब से पैसा ले रही है। इसकी बहुत अधिक संभावना है कि किसान सम्मान निधि में राज्य सरकार का 4,000 रुपये का योगदान भी वापस ले लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा पाठ्य पुस्तकों में बदलाव एनसीएफ के दिशा-निर्देशों के अनुसार किए गए थे। भाजपा 12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम को राज्य के ढांचे से एनसीएफ ढांचे में ले आई। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सनक और पसंद के हिसाब से ऐसा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, परिवर्तन एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार होना चाहिए। कांग्रेस सरकार को इसके परिणाम भुगतने होंगे। यह भारत के इतिहास से प्यार करने वाले लोगों के बड़े वर्ग की भावनाओं को भड़का रही है। हेडगेवार कांग्रेस पार्टी के सचिव थे। जब उन्होंने पाया कि उस पार्टी में भूमि और संस्कृति का कोई मोल नहीं है तो उन्होंने आरएसएस की स्थापना की।

