अफसरों पर नहीं दिख रहा बिहार सरकार के निर्देश का असर, दाखिल खारिज के मामलों के समाधान की गति अब भी काफी धीमी

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वीरेंद्र कुमार झा

बिहार में सरकार के लगातार निगरानी और निर्देश के बावजूद दाखिल खारिज मामलों में समाधान की गति काफी धीमी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के 31 मई के आंकड़ों के अनुसार मुजफ्फरपुर के मुसहरी अंचल में दाखिल खारिज की करीब 10233 मामले लंबित पाए गए हैं, जिसमें करीब 4048 मामलों पर आपत्ति लगाई गई है और यह करीब 60 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। वही इस मामले में दूसरे नंबर पर सीतामढ़ी के अंचल में दाखिल खारिज के करीब 10055 मामले लंबित हैं। इसमें से करीब 3301 पर आपत्ति लगाई गई है और यह भी करीब 60 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। राज्य में दाखिल खारिज के सबसे अधिक 44हजार74 मामले डुमरा अंचल में ही निरस्त किए गए हैं।

31 मई तक एक करोड़ मामले आए

21 मई तक दाखिल खारिज के कुल 1 करोड़ 6 लाख 71 हजार448 मामले आए ।जिसमें से 58 लाख 45 हजार 269 मामले में दाखिल खारिज हो गया है। 7 लाख 73 हजार749 मामले लंबित हैं। 40 लाख 52 हजार 430 मामले खारिज कर दिए गए हैं।

कार्रवाई का प्रावधान

विभागीय सूत्रों के अनुसार दाखिल खारिज के मामलों को बेवजह लटकाने का दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होती है। इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। प्रत्येक महीने दाखिल खारिज मामलों की विभिन्न स्तर पर अलग-अलग रैंकिंग जारी होती है और इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले को पुरस्कृत भी किया जाता है।वही खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों से इसका कारण भी पूछा जाता है और उन्हें चेतावनी दी जाती है। विभागीय स्तर पर लगातार शख्त मॉनिटरिंग हो रही है।

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