न्यूज़ डेस्क
संसद भवन का उद्घाटन आज हो गया। कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्षी पार्टियों ने इस उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया था। लेकिन बीजेपी कह रही है कि विपक्ष ने संसद का ही बहिष्कार किया है। बीजेपी की मीडिया लगातार इसे प्रचारित कर रही है। देश दंग है इस खेल से। विपक्ष का विरोध केवल उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों नहीं होने से है। संसद की प्रमुख और देश की प्रमुख मौजूदा राष्ट्रपति मुर्मू हैं लेकिन उन्हें इस समारोह से अलग रखा गया। लेकिन बीजेपी और सरकार यह नहीं बता रही है कि राष्ट्रपति के हाथ से क्यों उद्घाटन नहीं कराया गया। बीजेपी केवल यह कह रही है कि विपक्ष ने संसद का बहिष्कार किया है। भगत जन काफी उत्तेजित हैं और मोदी के नारे लगा रहे हैं।
उधर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन किए जाने के बाद कांग्रेस ने उन पर निशाना साधते हुए कहा, संसदीय प्रक्रियाओं की पूरी तरह तिरस्कार करने वाला आत्म-गौरवशाली सत्तावादी पीएम, जो शायद ही कभी संसद में भाग लेते हैं या इसमें शामिल होते हैं। कार्यक्रम के लिए 28 मई को चुनने पर सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस महासचिव संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक ट्वीट में कहा, इस दिन, 28 मई 1964 को भारत में सबसे अधिक संसदीय लोकतंत्र का पोषण करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का अंतिम संस्कार हुआ था और वी.डी. सावरकर, जिसके वैचारिक पारिस्थितिकी तंत्र ने महात्मा गांधी की हत्या की, का 1883 में जन्म हुआ था।
उन्होंने कहा, राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी महिला को अपने संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने और 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन करने की अनुमति नहीं है। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए राज्यसभा सदस्य रमेश ने कहा, संसदीय प्रक्रियाओं के लिए घोर तिरस्कार के साथ एक आत्म-गौरवशाली सत्तावादी प्रधानमंत्री, जो शायद ही कभी संसद में भाग लेता है या उसमें शामिल होता है। इससे पहले दिन में, पीएम मोदी ने पारंपरिक ‘पूजा’ और ‘हवन’ के बाद लोकसभा की कुर्सी के पास ऐतिहासिक ‘सेंगोल’ स्थापित किया और नए संसद भवन का उद्घाटन किया। बता दें कि कांग्रेस के अलावा, 19 अन्य विपक्षी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार किया।

