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बिहार में 17 या 18 मई को हो सकती है विपक्षी एकता की बैठक !

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अखिलेश अखिल 

कर्नाटक चुनाव के बाद फिर से विपक्षी एकता की बैठक हो सकती है। खबर के मुताबिक नीतीश कुमार इस बैठक की तैयारी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यह बैठक बिहार में 17 या 18 तारीख को हो सकती है। पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि कर्नाटक चुनाव के बाद विपक्षी एकता की एक बड़ी बैठक होगी। कर्नाटक में दस ट्रिख को चुनाव हैं जबकि इसके परिणाम 13 तारीख को आने हैं। कर्नाटक में बीजेपी और कांग्रेस के बीच चुनावी  घमासान है। बीजेपी किसी भी सूरत में फिर से सत्ता में लौटने की चाहत रखती है जबकि कांग्रेस किसी भी सूरत में कर्नाटक को अपने पाले में लेन को बेताब है।              
 सवाल है कि कर्नाटक में चुनाव लड़ रही कई पार्टियों में उन्होंने एचडी देवगौड़ा के परिवार की पार्टी जेडीएस को भी जोड़ा है क्या? कुछ समय पहले जेडीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी से उनकी मुलाकात हुई थी। कहा जा रहा है कि विपक्ष की बैठक से पहले वे एक बार फिर उनसे मिल सकते हैं या टेलीफोन करके उनसे बात कर सकते हैं। वैसे खबर ये भी है कि नीतीश कुमार लगातार देवगौड़ा से सम्पर्क बनाये हुए हैं। लेकिन जेडीएस की तरफ से अभी तक कोई बड़ा फैसला नहीं लिया गया है। माना जा रहा है कि जेडीएस कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद ही कोई बड़ा फैसला लेगी। 
      जानकार सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार का प्रयास है कि सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बैठाने और साझा मोर्चा की औपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले वे सभी दलों के नेताओं से एक बार अकेले मिल लें। वे ज्यादातर पार्टियों के नेताओं से मिल चुके हैं। कांग्रेस में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से उनकी मुलाकात हुई। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, सीपीएम के सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला आदि से वे मिल चुके हैं।    
अब वे बीजू जनता दल के नवीन पटनायक से मिलने जा रहे हैं। खबर के मुताबिक नीतीश कुमार कल मंगलवार को नवीन पटनायक से मिल सकते हैं। नवीन पटनायक का क्या निर्णय होगा यह काफी मायने राखत है। वैसे नवीन पटनायक जनता परिवार के ही हिस्सा रहे हैं। उनके पिता बीजू पटनायक बड़े समाजवादी नेता रहे हैं। उनके निधन के बाद नवीन पटनायक लगातार ओडिशा की सत्ता पर बैठे हैं। हलाकि उनकी महत्वकांक्षा राष्ट्रीय राजनीति ने नहीं रही है। वे केवल ओडिशा का हित साध रहे हैं। यही वजह है कि वे कई बार बीजेपी को भी समर्थन देते रहे हैं। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि नीतीश से मुलाक़ात के बाद कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है।    

          विपक्ष के तीन बड़े नेताओं- शरद पवार, एमके स्टालिन और के चंद्रशेखर राव से उनकी मुलाकात नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि वे किसी तरह से केसीआर से बात करने और कांग्रेस के साथ बैठक में शामिल होने के लिए बात करेंगे। जगन मोहन रेड्डी के विपक्षी बैठक में शामिल होने की कोई उम्मीद नहीं है।

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