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 क्या सच में बंद हो गया नासा? क्या पहले कभी हुआ था ऐसा?

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अमेरिका की प्रतिष्ठित अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 1 अक्टूबर 2025 से अपनी अधिकांश सेवाएं बंद कर दी हैं। इसका कारण है अमेरिकी कांग्रेस द्वारा बजट पारित न कर पाना, जिससे देशभर में सरकारी शटडाउन लागू हो गया है। नासा की वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा है कि एजेंसी “अगली सूचना तक बंद” रहेगी।

हालांकि नासा की सोशल मीडिया गतिविधियां और मिशन अपडेट्स पूरी तरह से बंद हैं, लेकिन निम्न कुछ जरूरी कार्य अभी भी सीमित कर्मचारियों के साथ जारी हैं।

सौरमंडल में सक्रिय अंतरिक्ष यान की देखरेख
ग्रह रक्षा कार्य जैसे क्षुद्रग्रह ट्रैकिंग
ये कार्य मानव जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें “अनिवार्य सेवाएं” माना गया है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अब तक लगभग 10 बार सरकारी शटडाउन से प्रभावित हो चुका है। दरअसल, जब अमेरिकी संसद (कांग्रेस) समय पर बजट पास नहीं कर पाती, तो कई सरकारी एजेंसियों की फंडिंग रुक जाती है और उन्हें अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ता है।नासा भी ऐसे ही हालात में अपने गैर-जरूरी काम रोक देता है, जबकि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मिशनों जैसी जरूरी गतिविधियां जारी रहती हैं।1980 के बाद से अब तक हुए इन शटडाउन ने नासा के कई शोध, प्रोजेक्ट्स और लॉन्च शेड्यूल पर असर डाला है।

नासा के शटडाउन से भविष्य के मिशनों पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
नासा के कई महत्वाकांक्षी मिशन जैसे Artemis कार्यक्रम, जो चंद्रमा पर मानव भेजने की तैयारी कर रहा है, अब विलंब का सामना कर सकते हैं।
अनुसंधान परियोजनाएं, विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग और कॉन्ट्रैक्चुअल कामकाज भी प्रभावित हुए हैं.

इस शटडाउन से नासा के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों में अनिश्चितता बढ़ गई है।पिछली बार 2018–2019 में भी ऐसा हुआ था, जिससे कई प्रोजेक्ट रुक गए थे।इस बार भी अगर राजनीतिक गतिरोध लंबा चला, तो चंद्रमा और मंगल मिशनों की गति धीमी पड़ रही है।
नासा का बंद होना यह दर्शाता है कि राजनीतिक निर्णय सीधे वैज्ञानिक प्रगति को प्रभावित करते हैं। जब तक वाशिंगटन में समाधान नहीं निकलता, तब तक नासा की टीम इंतजार में है और अंतरिक्ष की निगरानी चुपचाप जारी है।

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