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संसद में महिला आरक्षण बिल पेश , मायावती और राबड़ी देवी ने रखी मांग !

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अखिलेश अखिल 

मंगलवार को नए संसद भवन में महिला आरक्षण बिल को कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया। आरक्षण से जुड़ा यह 128 वां संविधान संशोधन नारी शक्ति बंदन विधेयक 2023 पेश किया।  बुधवार को इस पर चर्चा होगी और उम्मीद की जा रही है सदन में इस बार यह बिल पास हो जाएगा। इससे पहले सदन के नेता के रूप में नए संसद भवन की नई लोकसभा में पहले वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के दिन को अमरत्व प्रदान करने के लिए नए संसद भवन में सदन की पहली कार्यवाही के रूप में सरकार यह बिल लेकर आ रही है और वे आज के दिन दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों से इसे सर्वसम्मति से पारित करने की प्रार्थना करते हैं।           
   लोकसभा में बुधवार को महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा शुरू होगी। लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों द्वारा पारित किए जाने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इस कानून के प्रभावी होने के बाद लोकसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी और महिला सांसदों की संख्या 181 हो जाएगी।           
    वर्तमान लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या सिर्फ 82 है। इस संशोधन में वर्तमान में महिला आरक्षण को सिर्फ 15 वर्षों के लिए लागू करने का प्रावधान किया गया है। लेकिन, भविष्य में संसद इस अवधि को बढ़ा भी सकती है।   
                लेकिन इस महिला आरक्षण बिल को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है। राजद नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा है कि आरक्षण के अंदर वंचित, उपेक्षित, खेतिहर एवं मेहनतकश वर्गों की महिलाओं की सीटें आरक्षित हो। मत भूलो, महिलाओं की भी जाति है।उन्होंने आगे कहा है कि अन्य वर्गों की तीसरी, चौथी पीढ़ी की बजाय वंचित वर्गों की महिलाओं की अभी पहली पीढ़ी ही शिक्षित हो रही है, इसलिए इनका आरक्षण के अंदर आरक्षण होना अनिवार्य है।
                   उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी सरकारें महिला आरक्षण का बिल सदन में लेकर आती रही हैं। राजद महिला आरक्षण का विरोध करती रही है। लेकिन अब कई दल इस बिल के समर्थन में नजर आ रहे हैं।
     उधर बसपा प्रमुख मायावती ने ने  आरक्षण के लिए कुछ शर्तों की बात कही है। मायावती ने कहा है कि केंद्र सरकार महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण देने के लिए संसद में बिल लाने जा रही है। यह अच्छी बात है लेकिन महिलाओं की संख्या देखते हुए आरक्षण का प्रतिशत 33 नहीं बल्कि 50 होना चाहिए। साथ ही एससी, एसटी/ओबीसी कोटा भी सुनिश्चित होना चाहिए।
 मायावती ने कहा कि हमें उम्मीद है कि चर्चा के बाद इस बार बिल पास हो जाएगा, क्योंकि यह काफी समय से लंबित था।उन्होंने बताया कि मैंने संसद में अपनी पार्टी की ओर से कहा था कि महिलाओं की आबादी को ध्यान में रखते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को प्रस्तावित 33 की बजाय 50 प्रतिशत आरक्षण मिले।
                मायावती ने कहा कि हम पहले से ही इस विधेयक के समर्थन में हैं। महिला आरक्षण बिल को जातिवादी पार्टियां आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती हैं। इन वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होता है तो हम ये मान कर चलेंगे कि ये कांग्रेस की तरह इन्हें हाशिये पर रखना चाहते हैं।उन्होंने कहा कि सीटें बढ़ाई जाएं तो किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस बारे में सोचेगी। पुराने संसद भवन से विदाई हो चुकी है। इसे आसानी से भुलाया नहीं जा सकता है। मुझे संसद के दोनों सदनों में जाने का मौका मिला, जो मेरे लिए सौभाग्य की बात है। नए संसद की शुरूआत आज से की जा रही है जिसका बसपा दिल से स्वागत करती है।

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