संसद में महिला बिल पर चर्चा उधर भोपाल में चल रहा चूहा दौर !

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अखिलेश अखिल 
मध्यप्रदेश बीजेपी के चुनावी रणनीतिकार गृहमंत्री अमित शाह संसद में कह रहे थे कि  महिला आरक्षण बिल न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि  युग को बदलने वाला भी है। शाह साहेब कह रहे हैं तो ऐसा ही हो सकता है। उन्हें कहे को कौन काटेगा ? किसकी मजाल ? लेकिन नेताओं की बोली झूठी भी तो होती है। चुनावी दौरे में सभी नेता कहते हैं कि नहीं की सरकार बन रही है और वही जीतकर आ भी रहे हैं। शाह साहेब ने पिछले कई चुनावों में इसी तरह की बात की थी। लेकिन सब चुनाव हार गए। अभी हाल में ही यूपी की घोसी सीट भी बीजेपी हार गई। बड़े -बड़े दावे किये गए थे। बीजेपी के साथ गए राजभर आजकल कहाँ छुपे हुए हैं यह कोई नहीं जानता ! आजकल उनके बयान नहीं आ रहे हैं।    
            कोई इन नेताओं से नहीं पूछता कि आप लोग झूठ क्यों बोलते हो ? क्या झूठ बोलना पाप नहीं है ? गाँधी जी कहते थे कि सबसे बड़ा पाप तो झूठ बोलना ही है। हमारे सारे भगवान् भी तो यही कहते हैं। झूठ मत बोलो। अगर बोलना ही पड़े तो झट से माफ़ी मांग लो माथा हल्का हो जाएगा। मन शांत रहेगा। लेकिन यह बात नेताओं पर लागू नहीं होती क्या। सभी पार्टी के नेता दिन भर झूठ बोलते हैं। और यह भी कहते हैं कि वे सनातनी हैं। फिर पाखंड क्या है ? क्या धार्मिक व्यक्ति कभी झूठ बोल  सकता है ? 
                 खैर कहने का मतलब ये है कि राजनीति  झूठ पर ही टिकी हुई है। जो सच्चा होगा वह राजनीति में चल नहीं पायेगा .जो सबसे बड़ा घाघ होगा वही बड़ा नेता होगा। जितने भी दल चालने वाले नेता है वे बड़े -बड़े घाघ हैं। लगता है कभी -कभी तो उनके परिवार वाले भी उनकी काइयांपन से दंग राज जाते होंगे। अभी पिछले दिन ही शाह साहेब मध्यप्रदेश के दौरे पर गए थे। वे अक्सर जाते  भी रहते हैं। उन पर बड़ी जिम्मेदारी हैं।  भोपाल में कह रहे थे कि फिर से बीजेपी की सरकार आएगी। बीजेपी की बाला इंजन सरकार ने ये किया –वह किया — बीजेपी आएगी तब ही सनातन बचेगा बरना —   
                लेकिन भोपाल की हवा बेरुखी हो गई है। हर रोज बीजेपी से निकलकर नेता भाग रहे हैं। जैसे चूहे की दौर चल रही हो। हर रोज यह दौर जारी है। इधर संसद में शाह साहेब भाषण दे रहे थे उधर बुधनी के बड़े बीजेपी नेता अपने हजार समर्थन के साथ भोपाल पहुँच गए और कांग्रेस में समा गए। बुधनी बीजेपी का गढ़ है और शिवराज सिंह का इलाका भी। बुधनी से आने वाले नेता का नाम राजेश पटेल है।              
                    पटेल गाड़ियों के काफिले के साथ बुधनी विधानसभा से निकल कर भोपाल पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हो गए। दावा है कि उन्होंने अपने एक हजार कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस को ज्वाइन किया। इनमें बालाघाट के पूर्व सांसद और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बोध सिंह भगत भी शामिल हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं वालों की कतार लगी हुई है। बीजेपी के चार पूर्व विधायक और दो पूर्व सांसदों के साथ पचास के करीब छोटे-बड़े नेता पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

       कहा जा रहा है कि  पिछले तीन महीने के भीतर बीजेपी से कोई 58 नेता निकल चुके हैं। कल्पना कीजिये अगर एक नेता के साथ एक हजार समर्थक भी बीजेपी से निकल गए तो बीजेपी की हालत क्या होगी। लेकिन फिर भी जीत की बात होती है। नारे लगते हैं। फूल बरसाए जाते हैं। जिस  80 करोड़ जनता पांच किलो अनाज पाने के नाम पर सरकार बनाती है और बिगाड़ती है भला उस देश की जनता नेताओंके लिए फूल कहाँ से बरसाती होगी इसे समझने की जरुरत है। फूल बरसाने की पूरी कहानी प्रायोजित ही तो होती है। 

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