जानिए कर्नाटक चुनाव में कितने  हैं उम्मीदवार और क्या कमल हसन करेंगे कांग्रेस का प्रचार ?

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अखिलेश अखिल 

यह हर कोई जानता है कि किसी भी लड़ाई में जीत तो एक ही पक्ष की होती है लेकिन जीत के दावे वे सभी पक्ष करते हैं जो मैदान में डंटे होते हैं। कर्नाटक चुनाव की भी यही कहानी है। बीजेपी अभी सत्ता पर बैठी है और उसकी चाहत है कि उसकी सत्ता फिर से वापस हो। बीजेपी कर्नाटक को अपने लिए दक्षिण का द्वार मानती है। उसे लगता है कि कर्नाटक की हार का मतलब यह होगा कि उसकी दक्षिण की राजनीति कमजोर होगी। कर्नाटक के जरिये ही बीजेपी केरल और तेलंगाना के साथ ही आंध्रा को भी साध रही है। पिछले दिनों केरल में पीएम मोदी के दौरे को आप इसी रूप में देख सकते हैं। 
लेकिन कर्नाटक की कहानी इस बार बदली सी हो गई है। यहां कांग्रेस भी मजबूत है। इस बार के चुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत के साथ तो मैदान में है ही वह साम ,दाम ,दंड और भेद भी पनाने से नहीं चूक रही है। कांग्रेस के लिए कर्नाटक की लड़ाई काफी अहम है। जीत होती है तो उसकी ताकत बढ़ेगी और विपक्षी एकता के लिए उसका इकबाल भी बढ़ेगा। लेकिन हार हो गई तो कथित विपक्षी एकता की कहानी कमजोर होगी और एकता होगी भी तो क्षेत्रीय दलों के हिसाब से होगी और वहाँ कांग्रेस को मजबूर भी होना पड़ सकता है।    
 लेकिन कर्नाटक के इस चुनावी समर में कई और दल  भी ताल ठोंक रहे हैं। जिसकी चर्चा कही नहीं हो रही। इसकी चर्चा जरुरी है ताकि लगे कि कर्नाटक चुनाव की असली तस्वीर क्या है ?कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा कि 2,613 उम्मीदवारों में से 2,427 पुरुष, 184 महिलाएं और 2 अन्य उम्मीदवार हैं। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में बीजेपी से 224, मेलुकोटे में सर्वोदय कर्नाटक पार्टी के समर्थन को लेकर कांग्रेस से 223, जेडीएस से 207, आम आदमी पार्टी से 209, बहुजन समाज पार्टी से 133, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से 4, जनता दल यूनाइटेड से 8 और एनपीपी से 2 हैं। वहीं, पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) से 685 और निर्दलीय प्रत्याशी 918 हैं।    
 इन सभी दलों की कुछ न कुछ हैसियत है लेकिन चर्चा केवल कांग्रेस और बीजेपी की हो रही है। ऐसे में सवाल है कि जब वोटों के बीच टकराहट होगी और एक दूसरे के वोट काटेंगे तो हानि लाभ से कौन प्रभावित होगा ,यही बड़ी बात है। बसपा भी पूरी ताकत से मैदान में हैं। सूबे में 20 फीसदी दलित आबादी है और करीब 16 फीसदी मुस्लिम आबादी। बीजेपी की नजर इसी पर है। अगर बीजेपी ने कुछ वोट भी काटने की कोशिश की तो कांग्रेस के साथ ही बीजेपी को भी नुकसान हो सकता है। ऐसे ही आप की राजनीति है। जेडीएस की राजनीति तो वहाँ स्टेबल है और उसके कुछ वोट बैंक भी हैं। वह हमेशा किंग मेकर की भूमिका में ही रही है। लेकिन इस बार किंग मेकर कौन होगा कहाँ नहीं जा सकता। परेशानी कांग्रेस की भी है और बीजेपी की भी। दावे चाहे कुछ भी हों लेकिन शांति किसी को नहीं।    
आज पीएम मोदी कर्नाटक में चुनाव प्रचार करने पहुँच गए हैं। दो दिनों तक प्रचार करेंगे। कांग्रेस की परेशानी बढ़ी हुई है। वह डर भी रही है। यही वजह है कि कांग्रेस कोई और तोड़ भी पकड़ने को तैयार है। इसी बीच खबर आई है कि कांग्रेस के लोग कमल हसन के पास गए हैं ताकि उनके प्रचार में शामिल हों सकें। इस बात में कितनी सच्चाई है यह कोई नहीं जानता लेकिन इतना सच है कि कमल हसन इन दिनों कांग्रेस की नीतियों की सराहना करते रहे हैं।  खबर है कि मक्कल निधि मय्यम यानी  एमएनएम के नेता और अभिनेता कमल हासन से कांग्रेस ने संपर्क किया है और उनसे पार्टी के प्रचार के लिए अनुरोध किया है।      
 बता दें कि  कमल हासन ने तमिलनाडु में इरोड (पूर्व) उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार ईवीकेएस एलंगोवन को अपना समर्थन दिया था। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अब कथित तौर पर कमल हासन के पास दोबारा पहुंची है। पार्टी ने उनसे कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रचार करने का अनुरोध किया है। एमएनएम के सूत्रों ने बताया कि कमल हासन कांग्रेस आमंत्रण और चुनाव में प्रचार करने को लेकर सोच विचार कर रहे हैं। जाहिर है कुछ न कुछ खेल चल रहा है। और ऐसा हुआ तो कांग्रेस का ग्राफ और भी आगे बढ़ सकता है। कमल हसन की अपनी हस्ती है और दक्षिण के राज्यों में उनकी अपनी पहचान भी। 

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