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गुजरात में तीसरी बार भी क्लीन स्वीप करने की तैयारी में जुटी बीजेपी !

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अखिलेश अखिल

गुजरात तो वैसे भी बीजेपी का गढ़ है लेकिन पिछले दो लोकसभा चुनाव में जिस अंदाज में बीजेपी को से फीसदी सफलता मिली है क्या वही सफलता 2024 के चुनाव में बीजेपी को मिल सकती है ?पार्टी के भीतर इस पर चिंतन मनन जारी है। दिल्ली से लेकर गुजरात तक तक पर बैठक हो रही है और बीजेपी इस जुगाड़ में है कि इस बार भी गुजरात में बीजेपी को हो जाए। लेकिन यह सब क्या इतना आसान है ?
             गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें है। पिछले दो लोकसभा चुनाव में बीजेपी सभी सीटों पर चुनाव जीतती रही है। हालांकि विपक्षी कांग्रेस भी डीएम लगाकर चुनावी मैदान में उतरती जरूर है लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिली है। इस बार कांग्रेस और आप के बीच समझौता की बात जैसे ही सामने आई बीजेपी के कान खड़े हो गए। मंथन शुरू हुआ। और यह रणनीति बनी कि चाहे कुछ लोगों का टिकट ही क्यों न काटना पड़े गुजरात की सभी सीटें बीजेपी के पाले में लाना जरुरी है।
              अब बीजेपी के भीतर एक -एक सीट का आंकलन किया जा रहा है। खबर के मुताबिक बीजेपी बड़े स्तर पर संगठन में भी बदलाव की तैयारी में है इसके साथ ही उन सीटों का कभ बीजेपी आंकलन कर रही है जहाँ विपक्षी दलों से टकराव की स्थिति बन सकती है। कहा जा रहा है कि दर्जन भर ऐसी कांग्रेस और आप मिलकर बीजेपी को फाइट दे सकते हैं। बीजेपी के भीतर अब यह मंथन चल रहा है कि अगर इन सीटों के उम्मीदवारों को बदल दिया जाए तो क्या परिणाम आ सकते हैं।
              गुजरात में जातीय समीकरण को भी बैठाया जा रहा है। दलित और पिछड़े समाज के बीच कैसे तालमेल हो सकते हैं इस पर भी चर्चा की जा रही है और साथ ही संघ के लोगों द्वारा क्या कुछ मदद मिल सकती है इस पर भी विचार हो रहा है। जानकारी मिल रही है कि बीजेपी लगभग एक दर्जन सीटों पर नए उम्मीदवारों को उतार सकती है। उम्मीदवार भी ऐसे जो नए हों और जिनकी राजनीतिक और जातीय जमीन पर भी पकड़ हो। जिन लोगों के टिकट काटे जा सकते हैं उन्हें संगठन में जगह दी जा सकती है।
              एक बात और है कि गुजरात में बीजेपी के भीतर भी कई तरह के कलह हैं। कई नेता नाराज है और कई नेता पार्टी से ऊब भी चुके हैं। लेकिन अभी पार्टी के साथ इसलिए बने हुए हैं कि विपक्ष भी इन नेताओं को कोई भाव नहीं दे रहा है। ऐसे में बीजेपी यह मानकर चल रही है कि अगर कुछ असंतुष्ट लोग पार्टी से अलग भी होंगे तो इसकी भरपाई वे ऐसे नेता से करना चाहते हैं जो लम्बे समय तक पार्टी को मजबूती देने का काम कर सकते हैं। खबर के मुताबिक़ कोई दर्जन भर नए युवा नेताओं को पार्टी में उम्मीदवारी के तौर पर देखा जा रहा है। आदिवासी और को भी आगे किया जा रहा है।
               विपक्षी गठबंधन से पहले तक गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल सभी 26 सीटों को 5 लाख वोटों के मार्जिन से जीतने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे थे, लेकिन बीच में पार्टी के अंदरुनी झगड़ों की वजह से पाटिल थोड़े शांत है तो वहीं पार्टी के अंदरखाने में गठबंधन से कितना नुकसान हो सकता है। इसका आकलन किया जा रहा है। आप गुजरात में छह सीटों पर लड़ना चाहती है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी 19 सीटों पर लड़ेगी। दोनों पार्टियों के पास कोई सीट नहीं है। ऐसे में बीजेपी को अपनी सभी 26 सीटें बचानी पड़ेगी। ऐसी स्थिति को देखते हुए पार्टी अब नए सिरे विचार विमर्श में जुटी है। चर्चा है कि पार्टी 12 से 15 सांसदों की टिकट पर कैंची चला सकती है। इसमें कई कद्दावर नेताओं की चुनावी राजनीति पर विराम लग सकता है। पार्टी आदिवासी बेल्ट के साथ उत्तर गुजरात को लेकर काफी सतर्कहैं।

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